नगर परिषद के पास करने को कई काम हैं, लेकिन स्वच्छता नागरिकों के स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा विषय है। हर साल बड़ा बजट और संसाधन खर्च करने के बाद भी हमारा शहर क्यों स्वच्छता रैंकिंग में इतना नीचे है? यही सवाल उठाएंगे हम इस भास्कर अभियान में और चुनाव लड़ रही पार्टियों से हमारे शहर को स्वच्छ बनाने और टॉप दस शहरों में लाने का प्लान बनवाएंगे, लागू भी करवाएंगे। भास्कर न्यूज | राजसमंद प्रदेशस्तरीय स्वच्छता रैंकिंग- 2025 के आंकड़ों ने राजसमंद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी 100 अंकों की विस्तृत रिपोर्ट में नगर परिषद को महज 28.79 अंक मिले। 50 हजार से 3 लाख तक की आबादी वाले निकायों की श्रेणी में शहर 25वें स्थान पर रहा। खास बात यह है कि कचरा संग्रहण और निस्तारण जैसे मैदानी कामों में परिषद को पूरे अंक मिले, लेकिन निगरानी, जन- सहभागिता, प्रशासनिक कार्रवाई और दस्तावेजीकरण से जुड़े कई मानकों में शून्य अंक मिले। 1. प्लास्टिक पर सख्ती: नियमित जब्ती और चालान के साथ पूरी कार्रवाई डिजिटल पोर्टल पर दर्ज हो। 2. डिजिटल सेल: शिकायतों, स्वच्छता गतिविधियों और जरूरी दस्तावेजों के तत्काल अपडेशन के लिए अलग टीम बने। 3. जन-सहभागिता: स्कूल, कॉलेज और व्यापारिक संगठनों को जोड़कर रैलियां, प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटक कराए जाएं। 4. यूजर चार्ज वसूली: आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में पारदर्शी व्यवस्था से नियमित शुल्क वसूला जाए। 5. शौचालयों का रखरखाव: नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता और फीडबैक व्यवस्था सुनिश्चित कर वास्तविक उपयोग बढ़ाया जाए। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरा उठान के तकनीकी ढांचे, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और डंपिंग यार्ड प्रबंधन में परिषद का प्रदर्शन शत-प्रतिशत रहा। शौचालय निर्माण के मानक में भी पूरे अंक मिले। इसके विपरीत सार्वजनिक और कम्युनिटी शौचालयों के नियमित रखरखाव, वास्तविक उपयोग और सुविधाओं के प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों से यूजर चार्ज वसूली में भी परिषद पिछड़ी रही। प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ चालान और जब्ती की कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं मिलने से अंक कटे। स्वच्छता पर खर्च बजट की रिपोर्टिंग, जन-जागरूकता गतिविधियों और डिजिटल पोर्टल पर जरूरी जानकारी अपडेट करने में भी कमियां सामने आईं। रैंकिंग के आंकड़े बताते हैं कि शहर का प्रदर्शन लगातार कमजोर हुआ है। वर्ष 2019 में राजसमंद 23वें, 2020 में 21वें, 2022 में 20वें, 2023 में 22वें और 2024 में भी 22वें स्थान पर था। वर्ष 2025 में शहर दो पायदान नीचे खिसककर 25वें स्थान पर पहुंच गया। आबादी और शहर का दायरा बढ़ने के बावजूद पुरानी व्यवस्थाओं में समय के अनुसार सुधार नहीं किया गया। डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होने से भी गंवाए अंक: स्वच्छता सर्वेक्षण में धरातल पर काम के साथ उसका डिजिटल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण है। जन-शिकायतों के निस्तारण की जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई। एमबीएम प्रोजेक्ट से जुड़ी रिपोर्ट समय पर अपलोड नहीं होने और सोशल मीडिया पर स्वच्छता गतिविधियों का पर्याप्त प्रचार नहीं होने से भी नुकसान हुआ। प्लास्टिक जब्ती और चालान का डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होने से कार्रवाई के बावजूद उसका लाभ रैंकिंग में नहीं मिल सका।