राजस्थान के सबसे ऊंचे गांव शेरगांव की दुर्गम पहाड़ी बस्ती में अब पानी पहुंच गया है। गुरु शिखर से 12 किमी की कठिन और पथरीली चढ़ाई पार कर पहुंचने वाली इस बस्ती में न सड़क है और न बिजली। यहां 20 घरों के लोगों को पीने के पानी के लिए रोज करीब 2 किमी दूर जाना पड़ता था। मटके भरने के बाद उन्हें सिर पर उठाकर वापस लाना पड़ता था। इस पूरी कवायद में ग्रामीणों के कई घंटे सिर्फ पानी जुटाने में निकल जाते थे। लेकिन 20 दिन की कड़ी मेहनत के बाद यह समस्या दूर हो गई। गांव के उप सरपंच तरुण सिंह की पहल और आईआईएफएल फाउंडेशन के सहयोग से 60 ग्रामीणों ने मिलकर इस दुर्गम बस्ती तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की। पानी की टंकियां, पाइप और सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था के जरिए अब बस्ती के लोगों को घर के पास ही पानी मिल सकेगा। 8 सोलर प्लेटें, 2 टंकियां... सब कंधों पर ढोकर पहाड़ पर पहुंचाया गुरु शिखर से 8 सोलर प्लेटें हाथों और कंधों पर ढोकर बस्ती तक पहुंचाई गईं। प्रत्येक प्लेट का वजन 30 किलो है। इसके अलावा 1000-1000 लीटर की 2 पानी की टंकियां, 2 किमी लंबा पाइप, पानी की मशीन के साथ जरूरी इलेक्ट्रिक और छोटे पाइपों का सामान भी दुर्गम रास्ते से पहुंचाया गया। बस्ती से 2 किमी दूर स्थित कुएं पर सोलर पैनल लगाया गया। मशीन के जरिए मोटर सेट कर पाइप को पानी में उतारा गया। इसके बाद बस्ती के निकट करीब डेढ़ किमी तक पाइपलाइन बिछाई गई, जहां पानी की टंकियां रखकर कनेक्शन किया गया। अब मोटर चालू होते ही टंकियां भर रही हैं। जहां वाहन नहीं पहुंचते, वहां ग्रामीणों ने उठाया पूरा सामान : इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती थी। भारी पानी की टंकियां, लंबे पाइप और सौर ऊर्जा से जुड़ा ढांचा ऐसे पहाड़ी रास्तों से ऊपर पहुंचाना था, जहां वाहन नहीं जा सकते। ग्रामीणों ने सामान को हाथों और कंधों पर उठाकर दुर्गम रास्ता पार किया।