ब्रेस्ट कैंसर पर भास्कर की विशेष सीरिज के बाद अब सरकार की ओर से कैंसर की जांच से लेकर उपचार तक की सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की तैयारी दिखाई है। इस दिशा में ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग गांव-ढाणियों तक जो चुनौती बनी है, उसके लिए राज्य में पहले से संचालित 8 कैंसर जांच वैन के अलावा 31 जिलों में नई कैंसर वैन संचालित की जाएगी। इस वैन में स्तन कैंसर की जांच के साथ विभिन्न प्रकार के कैंसर की भी शुरुआती पहचान हो सकेगी। इसके अलावा श्रीगंगानगर, कोटा, अजमेर, झालावाड़, बीकानेर, उदयपुर, भीलवाड़ा और भरतपुर मेडिकल कॉलेजों में लिनियर एक्सीलिरेटर मशीनें स्थापित करने की तैयारी है। इन मशीनों से कैंसर मरीजों को बेहद आधुनिक तकनीक से सटीक, सस्ता और सुलभ ईलाज मिल सकेगा। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक प्रस्ताव बनाकर फाइनेंस विभाग को भेज दिया है। दोनों सुविधाओं पर करीब 350 करोड़ रुपए के बजट का अनुमान है, जिसके लिए केंद्र से भी मदद ली जाएगी। शेष | पेज 4 संबंधित डिप्टी डायरेक्टर (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) डॉ. वंदना शर्मा के मुताबिक फाइनेंस की मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिए बड़ी कंपनियों, घरानों आदि को आमंत्रित करेंगे। नई वैन में स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राफी, गर्भाश्य ग्रीवा कैंसर के लिए वीआईए जांच, डिजिटल एक्सरे, मुंह के कैंसर की जांच आदि सुविधाएं रहेंगी। हर वैन प्रतिमाह 15 शिविर करेगी, 1.29 करोड़ मंजूर भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कैंसर वैन के संचालन में हो रही लापरवाही को उजागर किया था। बहरहाल मौजूदा 8 वैन के लिए 1.29 करोड़ की प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी दी है। आदेश के मुताबिक हर वैन प्रतिमाह 15 जांच शिविर (8 वैन सालभर में 1440) करेगी। हर शिविर के लिए 9 हजार रुपए मंजूर किए हैं। इसमें अब स्टाफ के बजाए वैन ड्राइवर को 1000, सहायक को 500, डीजल अन्य खर्चों पर 7500 हजार रुपए खर्च किए जा सकेंगे। हर शिविर के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र निदेशालय को भेजना होगा। बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी कैंसर उपचार के लिए फिलहाल जयपुर-जोधपुर मेडिकल कॉलेज में लिनियर एक्सीलिरेटर मशीन है। नए प्रस्ताव के मुताबिक इसे दूसरी मेडिकल कॉलेजों के लिए भी खरीदा जाना है। पारंपरिक रेडिएशन मशीनों की तुलना में लीनियर एक्सीलिरेटर से कैंसर ट्यूमर का सटीक तरीके से इलाज हो सकेगा। इलाज का पूरा खाका तैयार कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग जरूरी है। दूर-दराज इलाकों तक वैन पहुंचे, जिसके लिए प्लानिंग है। सुविधाएं बढ़ाने के लिए 8 मेडिकल कॉलेजों पर पीपीपी और केंद्र की मदद से आधुनिक मशीनें उपलब्ध करानी है। एएनएम, सीएचओ की ट्रेनिंग का पूल तैयार करवा रहे हैं। -गायत्री राठौड़, प्रमुख सचिव हेल्थ