अजमेर में बंगाली समाज के दुर्गा उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अजमेर में दुर्गा प्रतिमा बनाने की परंपरा करीब 99 साल पुरानी है। 16 अक्टूबर से महोत्सव की शुरूआत होगी। इस बार तैयार होने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा मुकुट सहित करीब 12 फीट लंबी होगी और इसका वजन करीब साढ़े चार क्विंटल रहेगा। दुर्गा उत्सव की शुरुआत से पहले 15 अक्टूबर को महालया होगा। स्वर्गीय जगेन्द्र कुंडू ने अजमेर में बंगाली समाज के लिए पहली दुर्गा प्रतिमा बनाई थी। अब उनके पोते तरुण सिंह इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। तीन पीढ़ियों से उनका परिवार दुर्गा प्रतिमाएं बना रहा है। तरुण सिंह ने बताया कि उनके दादा के बाद उनके पिता तिनकोड़ी कुंडू ने प्रतिमाएं बनाईं और अब वे अपनी पत्नी ममता, भाई सुकुमार कुंडू और उनकी पत्नी प्रिया के साथ इस परंपरा को निभा रहे हैं। पहले केवल बंगाली समाज के लिए प्रतिमाएं बनाई जाती थीं, लेकिन अब अजमेर नगर निगम सहित आसपास के इलाकों से भी प्रतिमाओं की मांग आने लगी है। बांस-घास से तैयार होता है प्रतिमा का ढांचा प्रतिमा बनाने की शुरुआत लकड़ी, बांस, पटिया, घास और सुतली से होती है। सबसे पहले बांस और घास की मदद से प्रतिमा का आंतरिक ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद इस ढांचे पर मिट्टी की परतें लगाकर प्रतिमा को आकार दिया जाता है। प्रतिमा बनाने में तीन तरह की मिट्टी का इस्तेमाल होता है। इसमें चिकनी मिट्टी, बालू मिट्टी और पवित्र मिट्टी शामिल है। इन तीनों के मिश्रण से प्रतिमा का आकार तैयार किया जाता है। इसके बाद प्रतिमा को रंग और सजावट का रूप दिया जाता है। कोलकाता के सोनागाछी से लाई जाती है पवित्र मिट्टी प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली पवित्र मिट्टी को लेकर भी बंगाली समाज में एक खास परंपरा है। यह मिट्टी कोलकाता के सोनागाछी क्षेत्र से लाई जाती है। बंगाली परंपरा में यहां से लाई गई मिट्टी को विशेष माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस मिट्टी को अन्य मिट्टी में थोड़ी मात्रा में मिलाया जाता है। 15 अक्टूबर को महालया से शुरू होगी उत्सव की तैयारी बंगाली समाज के 99वें दुर्गा उत्सव की शुरुआत से पहले 15 अक्टूबर को महालया होगा। समाज के अनुसार, इस दिन सुबह करीब 4 बजे महिषासुर मर्दिनी (मंत्र) बजाए जाते है। इसी के साथ पितृ पक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन लोग तर्पण कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। संधि पूजा में सब्जियों की प्रतीकात्मक बलि उत्सव में संधि पूजा को प्रमुख अनुष्ठानों में माना जाता है। बंगाली समाज की मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इस दौरान विशेष पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार सब्जियों की प्रतीकात्मक बलि दी जाती है। इसमें गन्ना, पेठा और केले आदि शामिल किए जाते हैं। (इनपुट सहयोग-अंशिता परिहार) …….. पढें ये खबर भी… जिला परिषद चुनाव नामांकन का कल आखिरी दिन:अजमेर में अब तक एक भी पर्चा दाखिल नहीं हुआ; भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों की लिस्ट का इंतजार पंचायतीराज चुनाव के जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए नामांकन करने का कल आखिरी दिन है। जिला परिषद सदस्य के लिए जिले में चार जगह पर्चा दाखिल करने की व्यवस्था की गई है। अभी तक भाजपा व कांग्रेस की ओर से अधीकृत उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की गई है। दोनों पार्टियां आज लिस्ट जारी कर सकती हैं। पूरी खबर पढें