अजमेर में डेढ़ महीने पहले हुई चोरी की वारदात में पुलिस ने 3 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए तीनों आरोपी घटनास्थल के आस-पास ही रहते हैं। इससे पहले पुलिस ने आरोपी राजेश उर्फ लाला सोनी को गिरफ्तार किया था। घटना में 5 जुलाई को छतरी योजना निवासी भीष्म कुमार टेवानी ने क्रिश्चियन गंज पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वह परिवार के साथ उदयपुर में रहते हैं। पड़ोसियों ने सुबह फोन कर मकान का ताला टूटे होने की सूचना दी। अजमेर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि चोरों ने अलमारी, सेटी और पलंग के बॉक्स खोलकर घर का सामान बिखेर रखा था। चोर घर से वाशिंग मशीन, टीवी, गैस चूल्हा, दो गैस सिलेण्डर, चांदी के भगवान, चांदी के सिक्के, करीब 1 लाख 51 हजार 500 रुपए नकद, बर्तन इत्यादि ले गए। इन्हें किया गिरफ्तार जांच के दौरान पुलिस ने घटना स्थल से कुछ दूरी पर आंतेड़ स्कूल के पास रहने वाले राजेश उर्फ लाला सोनी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसके साथियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने कच्ची बस्ती आंतेड़ निवासी सुनील उर्फ सुन्या, रातिडांग ईदगाह गेट के पास रहने वाले नसीराबाद निवासी सूरज उर्फ गुरजा और पंचशील नगर थाना क्षेत्र के पास रहने वाले रमन उर्फ टांटिया को गिरफ्तार किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों से चोरी में इस्तेमाल वैन, दो गैस सिलेंडर और ताला तोड़ने के लिए प्रयुक्त लोहे का सरिया बरामद किया है। ग्रामीणों के नाम पर खाते खुलवा साइबर ठगी, 3 गिरफ्तार अजमेर गेगल थाना पुलिस ने ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत कार्रवाई कर तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ग्रामीणों को रुपयों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते और सिम लेते थे। इन्हीं खातों में ठगी की रकम मंगाकर ओटीपी के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। एसएचओ रोशन लाल सामरिया के अनुसार थाना क्षेत्र के खाताधारकों को चिह्नित कर जांच की गई। इसके बाद सुंदड़ों का मोहल्ला बुबानी निवासी सेठाराम मीणा (33), रमेश सिंह रावत (26) और पालियावास, पादूकलां मनीष मेघवाल (22) को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में साइबर पोर्टल 1930 पर 9 शिकायतें दर्ज हैं। इनमें कुल 4 लाख 73 हजार 691 की साइबर ठगी होना पाई गई है। पुलिस के अनुसार आरोपी गांव के लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद अकाउंट नंबर और उनके नाम की सिम लेकर इलेक्ट्रॉनिक साधनों के जरिए खातों तक पहुंच बनाते थे। खाते में ठगी की रकम आते ही ओटीपी लेकर उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद रकम निकालकर अन्य खातों में भेज दी जाती थी। इस तरह खाताधारक को जानकारी हुए बिना साइबर ठगी की जाती थी।