अलवर नगर निगम में बीजेपी का बोर्ड बनना करीब-करीब तय है। निगम में कुल 65 वार्ड हैं, जिनमें से बीजेपी के 28 और कांग्रेस के 23 प्रत्याशी पार्षद का चुनाव जीते हैं। बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है। बीजेपी को केवल 5 निर्दलीय चाहिए। जबकि 13 निर्दलीय जीते हैं। वहीं कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस को बहुमत के लिए 10 पार्षद चाहिए। बीजेपी की प्रदेश में सरकार है। इस कारण बीजेपी का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। वैसे भी बीजेपी को कांग्रेस की तुलना में आधे ही पार्षदों की जरूरत है। बीजेपी के 3 चेहरे- सुमनलता अग्रवाल, नेहा मनचंदा, अपूर्वा शर्मा खंडेलवाल बीजेपी में मेयर के अब दो चेहरे सबसे प्रमुख हैं। जिसमें पूर्व चेयरमैन रहे अजय अग्रवाल की पत्नी सुमनलता अग्रवाल और पुरुषोत्तम मनचंदा की पुत्रवधु नेहा मनचंदा हैं। दोनों मजबूत हैं। पुरुषार्थी समाज से होने के कारण नेहा मनचंदा का नाम सोशल इंजीनियरिंग के कारण प्रबल हैं। नेहा मनचंदा का जन्म खंडेलवाल परिवार में हुआ है। पुरुषोत्तम मनचंदा दो बार पार्षद रह चुके हैं। इनकी एक फैक्ट्री भी है। इससे पहले बीजेपी ने 2 बार (अशोक खन्ना व हर्षपाल कौर) पुरुषार्थी समाज के हाथ में नगर परिषद की कमान सौपी हैं। तीसरा नाम नीलेश खंडेलवाल की पुत्रवधु अपूर्वा शर्मा हैं, वे इसलिए दावेदार हैं क्योंकि नीलेश ने वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस छोड़ बीजेपी जॉइन की थी। जिनकी पुत्रवधु पुरुषार्थी समाज से आती हैं। सर नेम शर्मा लगाती हैं। खुद खंडेलवाल हैं। इन तीनों का माइनस पॉइनट- अजय अग्रवाल ने पिछली बार 2023 में कांग्रेस के टिकट से वन मंत्री संजय शर्मा के सामने अलवर शहर में विधानसभा का चुनाव लड़ा। अब मेयर बनते हैं तो आगे वापस अलवर शहर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट के प्रबल दावेदार हो जाएंगे। अपूर्वा शर्मा- युवा हैं, ससुर नीलेश खंडेलवाल ने करीब 3 साल पहले ही बीजेपी जॉइन की है। उनको कमान सौंपने से मूल रूप से बीजेपी के दावेदारों के नाराज होने का डर है। नेहा मनचंदा- पुरुषार्थी समाज से आती हैं। यह उनकी ताकत है। लेकिन पार्टी में अधिक सक्रिय नहीं रहे। उनके ससुर का कबाड़ी का अच्छा-खासा काम है। कांग्रेस में 2 ही नाम : कमलेश मिश्रा व ममता सैनी वैसे सीटों के गणित के हिसाब से कांग्रेस का बोर्ड बनता नजर नहीं आ रहा, लेकिन यदि कांग्रेस के पाले में 10 पार्षद आ जाएं तो बहुमत मिल सकता है। यह सरल नहीं है। मौजूदा कांग्रेस के 23 पार्षदों में सबसे मजबूत कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा व पूर्व सरपंच गब्बर सैनी की पत्नी ममता सैनी हैं। दोनों बोर्ड चलाने में भी समक्ष हैं, लेकिन बहुमत जुटाना बड़ा कठिन है। अब देखना है कि कांग्रेस किस चेहरे को आगे करती है। ज्यादा वोटों के अंतर से जीते टॉप 5 प्रत्याशी