अलवर नगर निगम के मेयर के चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशी बुधवार को नामांकन करेंगे। आज दोनों पार्टियां अपने मेयर प्रत्याशी का चेहरा घोषित कर सकती है। वार्ड पार्षद के परिणाम सामने आने के बाद बीजेपी में 3 और कांग्रेस में 2 प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। यह चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं है। बीजेपी के नेता 2019 का नगर परिषद सभापति का चुनाव नहीं भूले हैं। तब सभापति के चुनाव में बीजेपी के पास 27 पार्षद थे और कांग्रेस के 19 जीते थे। इसके बावजूद कांग्रेस ने 11 वोट से जीत दर्ज कर सबको चौका दिया था। ऐसा कहा गया कि उस चुनाव में बीजेपी के पार्षदों ने जमकर क्रॉस वोटिंग की थी। जितने बीजेपी के पार्षद जीतकर आए थे, उससे भी कम वोट मिले थे। तब कई निर्दलीय भी बीजेपी के पक्ष में खड़े थे। अब बीजेपी की मुश्किल यही है कि मेयर का प्रत्याशी कौन हो, जिसे सब स्वीकार कर लें। क्रॉस वोटिंग का डर नहीं रहे। इस बार भी कांग्रेस भी कमजोर नहीं है। बीजेपी की 28 और कांग्रेस की 23 सीट हैं। कांग्रेस के नेता ऐसा प्रत्याशी लेकर आएंगे, जिसे बीजेपी के जीते हुए पार्षद भी पचा सकें। ऐसा हुआ तो कांग्रेस परिणाम में चौंका सकती है। इस बार यह सब आसान नहीं है। चुनाव परिणाम के बाद से वन मंत्री संजय शर्मा के अलावा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव बराबर मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो 10 निर्दलीय पार्षद बीजेपी के पाले में जा सकते हैं। अब बीजेपी के पास ये चेहरे, जिनमें से दो पर सहमति का संकट अब बीजेपी के पास तीन प्रमुख चेहरे सामने हैं। दो चेहरे पीछे भी हैं। इन तीन में दो चेहरे ऐसे हैं, जिन पर सब पार्षदों की सहमति बनना आसान नहीं है। दो पार्षदों के परिवार के नेताओं को राजनीतिक बैकग्राउंड उथल पुथल वाला है। लेकिन परिवार से महिला ने चुनाव इसलिए ही लड़ा है कि आगे मेयर की कुर्सी है। तीन में से एक चेहरा ज्यादा सटीक बैठता है। उस पर ये बड़े नेताओं को राजी करना चुनौती भरा है। अपूर्वा शर्मा- युवा और सबसे अधिक शिक्षित हैं। काम करने का नया विजन है। उनके ससुर नीलेश खंडेलवाल ने करीब 3 साल पहले ही बीजेपी जॉइन की है। उनको कमान सौंपने से मूल रूप से बीजेपी के दावेदारों के नाराज होने का डर है। नेहा मनचंदा- पुरुषार्थी समाज से आती हैं। यह उनकी ताकत है। उनके ससुर का कबाड़ी का अच्छा-खासा पुराना काम है। अब फैक्ट्री भी चलाते हैं। बीजेपी पिछले दो बार से पुरुषार्थी समाज को नगर परिषद की कमान सौंपती आ रही है। कांग्रेस चौका सकती है प्रत्याशी के नाम में सीटों के गणित के हिसाब से कांग्रेस का बोर्ड बनता नजर नहीं आ रहा, लेकिन यदि कांग्रेस के पाले में 10 पार्षद आ जाएं तो बहुमत मिल सकता है। दूसरा गणित क्रॉस वोटिंग का भी है। जैसा पिछली बार कांग्रेस ने अलवर नगर परिषद सभापति के चुनाव में बड़ा खेल कर दिया था। यह सब करने के लिए कांग्रेस किसी ऐसे चेहरे पर दांव खेल सकती है, जिसका किसी को अनुमान नहीं है। वैसे कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी कमलेश शर्मा व पूर्व सरपंच गब्बर सैनी की पत्नी ममता सैनी का नाम है। लेकिन इनके अलावा तीसरा नाम आ सकता है।