जिले के सबसे बड़े बांगड़ हॉस्पिटल में मरीजों को डिस्चार्ज होने के बाद भी घर जाने के लिए 3-4 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। अक्टूबर से नया टेंडर होने के चलते भामाशाह अपडेट करने में समय लग रहा है। ऐसे में मरीज और उनके परिजन दोनों परेशान हो रहे है। इसको लेकर उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए समाधान की मांग की। सुबह 10 बजे डिस्चार्ज, लेकिन 3 बजे तक अपडेट नहीं रायपुर तहसील के बांसिया गांव के रहने वाले उगमाराम ने बताया- उनके रिश्तेदार रामाराम निवासी चांचोड़ी का एक्सीडेंट हो गया था। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे डिस्चार्ज किया लेकिन तीन बजे तक वे मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत फाइल अपडेट होने का इंतजार करते रहे। ऐसे में परेशान होना पड़ा। काफी देर के बाद भी छुट्टी की फाइनल अपडेट नहीं पाली जिले के भांवरी गांव की रहने वाली भगवती देवी ने बताया- खून की कमी होने के चलते उसे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे डिस्चार्ज कर दिया। उसके बाद रूम नंबर 48 में छुट्‌टी की फाइल अपडेट करवाने आई। दोपहर सवा तीन बजे तक फाइल अपडेट नहीं हुई। पूछा तो बोले कि स्टॉफ कम है। कमजोर के चलते बैठे-बैठे चक्कर आ रहे है। मरीज 5 घंटे तक परेशान होते रहे आना गांव के दलाराम बावरी की भी कुछ ऐसी ही कहानी थी। बोले कि उनके दो भांजे अशोक और मोहन एक्सीडेंट में घायल हो गए। वार्ड सुबह साढ़े 10 बजे डिस्चार्ज कर दिया। रूम नंबर 48 में फाइल अपडेट करवाने आए लेकिन 5 घंटे बाद भी डिस्चार्ज करने के कागजात अपडेट नहीं हुए। दोनों मरीज परेशान हो रहे है। लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। मरीजों को हो रही परेशानी 1 अक्टूबर से नई कम्पनी को टेंडर मिला है। ऐसे में मरीजों को डिस्चार्ज करने की फाइल वे स्केन कर जयपुर भेजते है। वहां पूरी तरह फाइल को चेक किया जाता है। वहां से स्वीकृति मिलने पर शेष कार्रवाई के बाद मरीज को छुट्टी दी जाती है। इस पूरे प्रोसेस में तीन से चार घंटे लग रहे। जिसका खामियाजा मरीज और परिजनों को उठाना पड़ रहा हैं। अधीक्षक बोले- जांच करवाकर सुधार करवाएंगे मामले में बांगड़ हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार ने कहा- मामले की जांच करवाकर व्यवस्था में सुधार करवाएंगे। ताकि मरीजों और उनके परिजनों को परेशान न होना पड़े।