​बांसवाड़ा शहर में सहित जिलेभर में अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार को भगवान गणेश को विदाई दी गई। सुबह से ही शहर के डायलाब तालाब पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। जहां घरों और पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर शाम तक जारी रहा। शहरवासी में गणेश विसर्जन के लिए जुलूस के रूप में डायलाब तालाब पहुंचे। ​श्रद्धालु पूरे परिवार के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप और गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के बीच बप्पा को लेकर तालाब पहुंचते रहे। तट पर पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक केवट-मांझी समाज के युवाओं को सौंपा गया। विसर्जन के इस दौर में शहरवासियों में गजब का उत्साह और भावुक माहौल देखने को मिला। सुरक्षा के कड़े पहरे में विसर्जन ​विसर्जन प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। तालाब पर 7 नावें और एक विशेष मचान बनाया गया। ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सुरक्षा के कड़े नियमों के तहत नावों में केवल चालकों और गोताखोरों को ही जाने की अनुमति दी गई है, अन्य किसी भी व्यक्ति के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। ​मांझी समाज के 50 से अधिक युवा संभाल रहे कमान ​प्रशासन के सहयोग से माझी समाज के 50 से अधिक कुशल युवा और गोताखोर इस पूरी प्रक्रिया को संभाले हुए थे। ये युवा नावों के जरिए प्रतिमाओं को तालाब के गहरे पानी में ले जाकर ससम्मान विसर्जित कर रहे थे। पुलिस प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्थाओं और होमगार्ड के जवानों की मुस्तैदी के चलते शहर में पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, अनुशासित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहा है।