बारां जिले में 92.75 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने डॉक्टर, इंजीनियर और फिजियोथेरेपिस्ट समेत चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक 10 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराए जा रहे थे और एक खाते के जरिए महज 10-15 दिन में करीब 3 से 4 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। पुलिस ने 20 लाख रुपए होल्ड करवाकर इनमें से 10 लाख रुपए पीड़ित को वापस दिलाए हैं। 54 हजार का मुनाफा दिखाकर जीता भरोसा एसपी अभिषेक अंदासू ने बताया कि एक महिला ने ट्रेडिंग ऐप पर मुनाफे का झांसा देकर बारां के व्यापारी विष्णु गालव से संपर्क किया। शुरुआत में ऐप पर 54 हजार रुपए का लाभ दिखाया गया, जिससे व्यापारी को भरोसा हो गया। इसके बाद विष्णु गालव और उनकी पत्नी संगीता के बैंक खातों से कुल 92.75 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाए गए। ऐप पर डॉलर में बढ़ती रही रकम, निकासी नहीं हुई ठगी का तरीका ऐसा था कि ट्रेडिंग ऐप पर निवेश की गई रकम लगातार डॉलर में बढ़ती हुई दिखाई देती रही। पीड़ित को लगा कि उसके निवेश पर अच्छा मुनाफा हो रहा है, लेकिन जब रकम निकालने की कोशिश की गई तो निकासी नहीं हो सकी। इसके बाद ठगी का पता चला और 20 दिसंबर 2025 को मामला दर्ज कराया गया। कमीशन के लालच में दिए बैंक खाते पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराए जा रहे थे। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों और उनके लेनदेन की कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। इंजीनियर ने डॉक्टर के जरिए नेपाल बैठे सरगना तक पहुंचाया खाता पुलिस के अनुसार आरोपी राज अतुल भाई पडसाला (24) ने अपनी फर्म आर्य केमिकल्स का बंधन बैंक खाता इंजीनियर अशोक भाई रमाणी (33) को दिया था। रमाणी ने यह खाता डॉ. जयदीप आदरेशणा (41) और लक्ष्मण वाघेला (25) के जरिए नेपाल में बैठे साइबर ठगी के सरगना तक पहुंचाया। पुलिस के मुताबिक इसी खाते से 10-15 दिन के भीतर करीब 3-4 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। 20 लाख होल्ड, 10 लाख पीड़ित को वापस जांच के दौरान पुलिस ने ठगी की रकम से जुड़े 20 लाख रुपए होल्ड करवाए। इनमें से 10 लाख रुपए पीड़ित को वापस दिलाए गए हैं। पुलिस अब मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर ठगी के नेटवर्क और नेपाल में बैठे कथित सरगना से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।