बारां जिले के निकाय चुनाव में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बारां नगरपरिषद में पहली बार चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस और भाजपा के गढ़ में सेंध लगाते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। कुल 60 वार्डों में से AAP ने 31 वार्ड जीतकर बोर्ड बनाने के लिए जरूरी सीटें जीत लीं। कांग्रेस 18 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को सिर्फ 9 सीटें मिलीं। पिछली बार भाजपा ने 21 सीटें जीती थीं। लगातार 3 बार बोर्ड बनाने वाली कांग्रेस का प्रभाव इस बार कम हो गया। पूर्व सभापति और उनकी पत्नी दोनों जीते इस चुनाव में पूर्व सभापति कमल राठौड़ और उनकी पत्नी शीतल राठौड़ की जीत खास बात रही। कमल राठौड़ वार्ड 46 से 252 वोटों से जीते, जबकि शीतल राठौड़ वार्ड 37 से 305 वोटों से विजयी रहीं। दोनों ने पूरे शहर में प्रचार की जिम्मेदारी संभाली थी। भाजपा जिला महामंत्री की पत्नी भी जीतीं बारां में सभापति की सीट महिला अनारक्षित होने के कारण कई नेताओं ने अपनी पत्नियों को टिकट दिलवाया था। भाजपा जिला महामंत्री राकेश जैन की पत्नी निलेश जैन वार्ड 38 से जीतीं, लेकिन उनकी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। कई बड़े नेता चुनाव हार गए। इनमें कांग्रेस के जिला संगठन महामंत्री कैलाश जैन की पत्नी अनिता जैन, निवर्तमान पार्षद शिवशंकर यादव और मयंक माथोड़िया जैसे चेहरे शामिल हैं। वहीं, कांग्रेस शहर अध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज की पत्नी मीनाक्षी भारद्वाज वार्ड 27 से और पूर्व उपसभापति नरेश गोयल की पत्नी रानू गोयल वार्ड 40 से जीतकर अपनी पार्टी के लिए कुछ सीटें बचाने में सफल रहीं। अंता में बोर्ड बनाने का फैसला निर्दलीयों पर निर्भर अंता में 2020 जैसा ही नतीजा रहा। यहां 35 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 16-16 सीटें मिलीं। 3 निर्दलीय पार्षद जीते हैं, इसलिए बोर्ड बनाने का फैसला निर्दलीय पार्षदों पर निर्भर है। अटरू में कांग्रेस का बोर्ड तय अटरू में 25 वार्डों में से कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं और वह बोर्ड बनाएगी। भाजपा को 10 और 1 निर्दलीय पार्षद जीता। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्णमुरारी दिलावर जीत गए, लेकिन भाजपा को बहुमत नहीं मिला। सीसवाली में भी निर्दलीयों की अहम भूमिका छबड़ा में भाजपा ने 14, कांग्रेस ने 12, निर्दलीयों ने 7 और बसपा ने 2 सीटें जीतीं। मांगरोल में भाजपा ने बहुमत हासिल किया, 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 10 और 6 निर्दलीय पार्षद जीते। सीसवाली में कांग्रेस को 9, भाजपा को 6 और 5 निर्दलीय पार्षद जीते। यहां भी निर्दलीय पार्षद अहम भूमिका निभाएंगे।