बाड़मेर शहर के अलग-अलग गली मोहल्ले में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का शुक्रवार को अलग-अलग तालाबों पर विसर्जन किया गया। शहर के नजदीक तालाबों पर शुभ मुहूर्त के साथ ही शुक्रवार को गजानन प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया, लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से तालाब सूखे नजर आए। इस वजह से श्रद्धालुओं को विसर्जन करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई लोग जसदेर तालाब के पास मूर्ति छोड़कर चले गए। दरअसल, गणेश चतुर्थी 14 सितंबर के दिन बाड़मेर शहर से लेकर गांव तक गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। 10 दिन तक चले गणपति महोत्सव के आखिरी दिन शुक्रवार को शहर के नजदीक तालाब, जसदेर, गोशाला के पास और सोन नाडी में गणपति का विसर्जन किया गया। दर्जियों का पुराना वास निवासी महिला हस्तु का कहना है कि जसदेर धाम आए थे, लेकिन यहां पर पानी नहीं होने से विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। पानी नहीं होने से मूर्ति विसर्जन नहीं करके वापस जाना पड़ा। पानी होने पर पानी में गणेश जी को स्नान करवाते, फिर विसर्जन करते। हालांकि शहर में विभिन्न मोहल्लों में स्थापित गणपति की प्रतिमाओं की डीजे की धुन पर युवाओं ने शोभायात्रा निकाली। शहर के विभिन्न मोहल्ले में स्थापित छोटे और बड़े गणपति के विसर्जन के लिए शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कई शहर के नजदीक तालाब पर पहुंचे। शुक्रवार शाम 5 बजे तक करीब 200 से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। शुक्रवार को सुबह से ही शहर में धूमधाम से गणेश जी की सवारियां निकाली गई। डीजे, ढोल शंखनाद के साथ हजारों गणपति भक्तों ने गणपति बप्पा मोरिया,भारत माता के जयकारों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शहर से होकर निकली शोभायात्रा गणपति महोत्सव समिति के आह्वान पर शोभायात्रा शहर के अलग-अलग स्थान कल्याणपुरा, सुभाषचौक, गायत्री चौक, आजादचौक, तनसिंह सर्किल से अलग-अलग मंडलों द्वारा गणपति रथ रवाना किए। ये रथ अहिंसा सर्किल से होते हुए विवेकानंद सर्किल पहुंचे। वहां से गणेश विसर्जन की संवारियां अलग-अलग नजदीक के तालाब पर पहुंची। वहां गजानंद की आरती शंखनाद के साथ सामूहिक गणपति विसर्जन किया गया।