रावल मल्लीनाथ राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के अधीन मालाजाल और पालिया परिसरों में निर्माणाधीन मंदिरों की प्रगति और आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों को लेकर बाड़मेर के होटल कलिंगा पैलेस में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु, प्रबुद्धजन और विभिन्न परिवारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता रावत त्रिभुवन सिंह बाड़मेर और कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने की। इस दौरान मंदिर निर्माण की वर्तमान स्थिति, आगामी कार्ययोजना और प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियों पर चर्चा की गई। आयोजन में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए गांव-गांव तक आमंत्रण पहुंचाने का निर्णय लिया गया। मालाजाल और पालिया में 5 मंदिरों का निर्माण संस्थान के मालाजाल परिसर में श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर और दक्षिणमुखी श्री हनुमान जी मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं पालिया परिसर में श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर, श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर और श्री चामुण्डा माता मंदिर का निर्माण प्रगतिरत है। इन सभी निर्माणाधीन मंदिरों की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा 2 सितंबर 2027, गुरुवार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वितीया को प्रस्तावित है। बैठक में इस आयोजन को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप देने के लिए देश-प्रदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं तक निमंत्रण पहुंचाने पर जोर दिया गया। रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य और संतत्व को किया याद कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने संत शिरोमणि रावल मल्लीनाथ जी के जीवन, शौर्य, पराक्रम, शासन, आध्यात्मिक साधना और लोककल्याणकारी परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रावल मल्लीनाथ जी शौर्य, वीरता, धर्म, लोककल्याण और संतत्व के अद्वितीय प्रतीक रहे हैं। उन्होंने कहा कि रावल मल्लीनाथ जी ने मालाणी क्षेत्र की स्थापना कर इसे विशिष्ट ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान दी। अपने जीवनकाल में उन्होंने पांच प्रमुख युद्धों में असाधारण शौर्य का प्रदर्शन किया। कुशल शासक और महान योद्धा होने के साथ उनका जीवन आध्यात्मिक साधना और संतत्व की ओर भी अग्रसर हुआ। इसी कारण वे लोकमानस में शौर्य और संतत्व के अद्भुत समन्वय के रूप में प्रतिष्ठित हैं। जसोल ने चैत्र कृष्ण पंचमी को मनाई जाने वाली श्री रावल मल्लीनाथ जी की जन्म जयंती और उनसे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का भी उल्लेख किया। राणी रूपादे जी की भक्ति का भी किया उल्लेख उन्होंने कहा कि राणी रूपादे जी की भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चेतना का रावल मल्लीनाथ जी के जीवन पर गहरा प्रभाव रहा। राणी रूपादे जी की प्रेरणा और गुरु उगमसी भाटी के सान्निध्य ने उनके आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा दी। दोनों की जीवनगाथा शौर्य, भक्ति, त्याग और संतत्व के अनुपम संगम के रूप में जनमानस की श्रद्धा का केंद्र है। राणी चंद्रावल और राणीसा भटियाणीसा से जुड़ी लोकमान्यता बताई कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने राणी रूपादे जी, राणी चंद्रावल जी और श्री राणीसा भटियाणीसा से जुड़ी प्रचलित लोकमान्यता एवं आध्यात्मिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लोकमान्यता के अनुसार जब श्री रावल मल्लीनाथ जी और राणी रूपादे जी भवसागर से पार होने के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब राणी चंद्रावल जी ने अपनी चिंता व्यक्त की। इस पर राणी रूपादे जी ने उन्हें इसी कुल में पुनः अवतरित होने का वरदान दिया। प्रचलित मान्यता के अनुसार राणीसा भटियाणीसा को राणी चंद्रावल जी का अवतारी स्वरूप माना जाता है। जसोल ने कहा कि यह परंपरा रावल मल्लीनाथ जी एवं राणी रूपादे जी की आध्यात्मिक विरासत से राणीसा भटियाणीसा की लोकआस्था के संबंध को दर्शाती है। 2017 की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अब पंच मंदिरों का महोत्सव बैठक में वर्ष 2017 में श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया की हुई भव्य प्राण-प्रतिष्ठा को भी याद किया गया। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए संस्थान की ओर से मालाजाल एवं पालिया परिसरों में मंदिरों का निर्माण करवाया जा रहा है। त्रिभुवन सिंह ने कहा- व्यापक जनभागीदारी से आयोजन को मिलेगी भव्यता रावत त्रिभुवन सिंह बाड़मेर ने रावल मल्लीनाथ जी एवं राणी रूपादे जी की गौरवशाली विरासत और लोकआस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्माणाधीन मंदिर आने वाली पीढ़ियों को इतिहास, संस्कार और परंपराओं से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से 2 सितंबर 2027 को होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में परिवार सहित शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की व्यापक उपस्थिति से महोत्सव को भव्यता और दिव्यता मिलेगी। मंदिर निर्माण कार्यों की सराहना बाल सिंह मारूड़ी ने रावल किशन सिंह जी जसोल के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में चल रहे मंदिर निर्माण कार्यों की सराहना की। उन्होंने इसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर प्रचार-प्रसार पर जोर मांगू सिंह विशाला ने रावल मल्लीनाथ और राणी रूपादे जी की परंपरा के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने श्री राणी रूपादे संस्थान, बाड़मेर की स्थापना एवं पंजीयन तथा इससे जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने आगामी पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों में इसका संदेश पहुंचाने तथा अधिकाधिक श्रद्धालुओं को आयोजन से जोड़ने पर बल दिया। युवाओं से विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान आजाद सिंह शिवकर ने युवाओं से रावल मल्लीनाथ जी एवं राणी रूपादे जी की गौरवशाली विरासत, जीवन आदर्शों, इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा इस ऐतिहासिक आयोजन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन महेंद्र सिंह जी तारातरा ने किया। बैठक के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं प्रबुद्धजनों ने 2 सितंबर 2027 को प्रस्तावित प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का निमंत्रण गांव-गांव और देश-प्रदेश में निवासरत श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का संकल्प लिया। साथ ही अधिकाधिक लोगों को परिवार सहित आयोजन में शामिल कर इसे भव्य, दिव्य और स्मरणीय बनाने का आह्वान किया गया।