ब्यावर पुलिस ने साकेत नगर थाना क्षेत्र से 14 माह पूर्व लापता हुई एक नाबालिग बालिका को सकुशल दस्तयाब कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को हिरासत में लिया है। नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी भी सामने आई है और मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार नाबालिग के परिजनों ने 2 जून 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी 16 वर्षीय बेटी सुबह करीब 10:45 बजे घर से बिना बताए चली गई थी और वापस नहीं लौटी। परिजनों ने रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस पर साकेत नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अथक प्रयासों और तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए नाबालिग को ढूंढ निकाला। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने और डिजिटल सबूत मिटाने की साजिश रची थी। मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई थी जब घर से जाने से पहले नाबालिग अपनी नोटबुक में अंग्रेजी में 'Want to Die' (मरना चाहती हूं) लिखकर गई थी। इस नोट से परिजनों और पुलिस के बीच उसके साथ किसी अनहोनी की आशंका बढ़ गई थी, जिससे चिंता और तनाव बढ़ गया था। विशेष पुलिस टीम ने लगातार किया अनुसंधान मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ब्यावर रतन सिंह के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनुकृति उज्जैनिया के मार्गदर्शन तथा वृत्ताधिकारी ब्यावर नरेन्द्र पारीक के निकट सुपरविजन में थानाधिकारी आशुतोष पाण्डे के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट्स और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लगातार निगरानी की। राजस्थान सहित अन्य संभावित राज्यों और जिलों में कई स्थानों पर दबिश देकर सुराग जुटाए गए। साथ ही पुलिस ने परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से उन्हें ढांढस भी बंधाया। आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अपनाए कई तरीके पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कंप्यूटर, फोटोग्राफी और मोबाइल रिपेयरिंग का जानकारी है। उसने नाबालिग को अपने साथ ले जाने से काफी समय पहले योजना तैयार कर ली थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने डिजिटल सुराग नहीं छोड़ने के लिए अपने और नाबालिग के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल नहीं करने की योजना बनाई और दोस्तों से प्राप्त सिम का उपयोग किया। घटना वाले दिन आरोपी नाबालिग को घर के बाहर से बुलाकर टैक्सी से विजयनगर ले गया। वहां से मोटरसाइकिल पर लिफ्ट लेकर टैक्सी स्टैंड पहुंचा और फिर टैक्सी से केकड़ी तथा बस के जरिए देवली पहुंचा। इसके बाद टैक्सी से कोटा और वहां से भोपाल चला गया। भोपाल में कमरा किराये पर लेकर दोनों करीब एक माह तक बाहर नहीं निकले। इसके बाद आरोपी नाबालिग को भोपाल में छोड़कर आगरा चला गया। पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से उसने आगरा में एक पार्क के पास अपना मोबाइल जानबूझकर गिरा दिया। पुलिस टीम ने सर्विलांस के आधार पर उस मोबाइल को आगरा से बरामद किया, लेकिन आरोपी और नाबालिग का वास्तविक ठिकाना भोपाल में था। पहचान छिपाने के लिए बदले काम पुलिस के अनुसार भोपाल में आरोपी ने पहले पानीपुरी का ठेला लगाया, लेकिन पहचान उजागर होने की आशंका के चलते यह काम छोड़ दिया और मजदूरी करने लगा। वह नाबालिग के बालिग होने का इंतजार करता रहा। नाबालिग के बालिग होने के बाद दोनों ने भोपाल में आर्य समाज के माध्यम से विवाह किया और अप्रैल माह में मध्यप्रदेश शासन से विवाह का पंजीयन भी करवाया। इसके बाद नाबालिग ने अपने परिजनों से संपर्क किया, लेकिन परिजनों ने लोकलाज के चलते पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी। बाद में परिजनों और आरोपी ने वकील से संपर्क कर अजमेर आने की योजना बनाई। अजमेर पहुंचते ही पुलिस ने ट्रेस की लोकेशन पुलिस टीम इस दौरान तकनीकी सर्विलांस की लगातार मॉनिटरिंग करने के साथ मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय रखे हुए थी। आरोपी के अजमेर आने की सूचना और लोकेशन ट्रेस होते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई कर नाबालिग को सकुशल दस्तयाब कर लिया और आरोपी को डिटेन कर लिया। पुलिस द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है और प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई और अनुसंधान जारी है। पुलिस की इस कार्रवाई से 14 माह से अपनी बेटी की तलाश कर रहे परिजनों को बड़ी राहत मिली है।