ब्यावर नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव परिणाम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद सभापति की कुर्सी को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। 21 सितंबर को होने वाले सभापति चुनाव से पहले दोनों दलों ने अपने जीते हुए पार्षदों की बाड़ेबंदी कर दी है। भाजपा और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीय पार्षदों और RLP के समर्थन के लिए भी कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे में सभापति चुनाव में निर्दलीय और RLP पार्षदों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। शपथ के लिए एसडीओ कार्यालय पहुंचे पार्षद सोमवार को नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के जीते हुए प्रत्याशियों ने शपथ नहीं ली थी। मंगलवार सुबह सभी जीते हुए पार्षद उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर जयपाल सिंह राठौड़ के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय पार्षदों ने उपखंड अधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर जयपाल सिंह राठौड़ के सामने पद और गोपनीयता की शपथ ली। कांग्रेस का दावा- निर्दलीयों के सहयोग से बनाएंगे बोर्ड शपथ के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष किशोर सिंह चौधरी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पारस पंच ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 20 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। उन्होंने कहा कि निर्दलीय पार्षदों के सहयोग से कांग्रेस नगर परिषद में शहरी सरकार बनाने में सफल होगी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता निर्दलीय प्रत्याशियों पर दबाव बना रहे हैं और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। RLP के समर्थन का भी दावा कांग्रेस जिलाध्यक्ष किशोर सिंह चौधरी ने दावा किया कि RLP के जीते हुए पार्षद भी कांग्रेस का समर्थन करेंगे। कांग्रेस के इस दावे के बाद सभापति चुनाव में निर्दलीय और RLP पार्षदों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। दोनों प्रमुख दल अब इन पार्षदों को अपने पक्ष में साधने की कोशिश कर रहे हैं। शपथ के बाद पार्षदों को अलग-अलग गाड़ियों से रवाना किया मंगलवार को शपथ लेने के बाद कांग्रेस नेताओं ने पार्षदों को तुरंत अलग-अलग गाड़ियों में बैठाकर अज्ञात जगह भेज दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष किशोर चौधरी, माइन्स एवं माइनिंग प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष आशीषपाल पदावत और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पारस पंच की मौजूदगी में सभी जीते हुए पार्षदों को गाड़ियों से रवाना किया गया। 21 सितंबर को साफ होगा किसके सिर सजेगा ताज नगर परिषद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण अब सभापति चुनाव से पहले समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीय और RLP पार्षदों का समर्थन हासिल करने में जुटे हैं। 21 सितंबर को होने वाले सभापति चुनाव में किस दल का प्रत्याशी बाजी मारता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।