नगर परिषद ब्यावर के 60 वार्डों के चुनाव परिणाम में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। भाजपा 23 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि कांग्रेस को 20 और आरएलपी को 4 सीटें मिली हैं। वहीं 13 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी जीत दर्ज की है। बोर्ड गठन के लिए 31 सीटों का बहुमत जरूरी है, लेकिन कोई भी दल इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। ऐसे में अब नगर परिषद की सत्ता की चाबी 13 निर्दलीय पार्षदों के हाथ में मानी जा रही है। मतगणना के बाद साफ हुआ बोर्ड का गणित 9 सितंबर को 60 वार्डों के लिए मतदान के बाद सोमवार को मतगणना कराई गई। मतगणना केंद्र पर सुबह 8 बजे से शुरू हुई प्रक्रिया में अलग-अलग राउंड के दौरान वार्डवार परिणाम घोषित किए गए। सभी वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद नगर परिषद में बोर्ड गठन की तस्वीर भी साफ हो गई। किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन 8 सीट दूर भाजपा ने 23 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़े दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 31 सीटों से भाजपा अभी 8 सीट दूर है। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। कांग्रेस 20 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि आरएलपी ने 4 वार्डों में जीत दर्ज की। 13 निर्दलीय तय कर सकते हैं किसका बनेगा बोर्ड चुनाव परिणाम के बाद ब्यावर नगर परिषद की राजनीति में 13 निर्दलीय पार्षद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में आ गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने दम पर बहुमत से दूर हैं, जबकि आरएलपी के पास 4 सीटें हैं। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों का समर्थन हासिल करना राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। समर्थन के लिए शुरू होगी सियासी कवायद परिणाम सामने आने के साथ ही अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। निर्दलीय पार्षद किस दल के साथ जाते हैं, इसी से नगर परिषद में सत्ता का समीकरण तय होगा। आने वाले दिनों में समर्थन, बातचीत और पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कोशिशों के बीच ब्यावर की सियासत में दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकता है।