कांग्रेस के पीसीबी मेंबर ने निकाय चुनाव में 17 सिंबल नहीं मिलने और कार्रवाई नहीं होने के विरोध में गांधी जयंती पर तीन बंदरों के साथ पैदल मार्च निकाला। भोपाल क्लब के बाहर से गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद लाठी लेकर मार्च शुरू किया। गांधीजी के तीन बंदरों को साथ लेकर कांग्रेस जिला कार्यालय पहुंचे। पालीवाल का आरोप है कि वे करीब एक महीने से इस मामले को लेकर अपनी बात प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदेश नेतृत्व को न उनकी बात सुनाई दे रही है और न ही स्थिति दिखाई दे रही है। गांधी प्रतिमा से कांग्रेस कार्यालय तक पैदल मार्च पालीवाल ने बताया कि आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म जयंती है और गांधीजी हम सबके आदर्श हैं। उन्होंने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पैदल यात्रा शुरू की। यात्रा जिला कांग्रेस कार्यालय तक निकाली गई। बोले- प्रदेश नेतृत्व की हालत तीन बंदरों जैसी पालीवाल ने कहा कि पैदल यात्रा में गांधीजी के तीन बंदर इसलिए शामिल किए गए, क्योंकि उनके अनुसार प्रदेश नेतृत्व इन तीन बंदरों के समान हो चुका है। उन्होंने कहा- मैं लगातार एक महीने से अपनी बात चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा हूं, लेकिन प्रदेश नेतृत्व को सुनाई नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव में पार्टी पदाधिकारियों की लापरवाही के चलते कांग्रेस को 17 सिंबल नहीं मिले। इससे महापौर और उपमहापौर के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार सकी। पालीवाल ने कहा कि इतना सब होने के बाद भी करीब एक महीने से प्रदेश नेतृत्व की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। गांधीजी से सद्बुद्धि देने की कामना पालीवाल ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व की हालत गांधीजी के तीन बंदरों जैसी हो गई है, जिन्हें न कुछ दिखाई देता है, न सुनाई देता है और उनके मुंह पर भी पट्टी बंधी है। इसी कारण उन्होंने तीन बंदरों के साथ पैदल यात्रा निकाली। उन्होंने बताया कि यात्रा भोपाल क्लब के बाहर गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद शुरू की गई। इसके बाद कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर माला चढ़ाई और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा तथा भीलवाड़ा जिले के पदाधिकारियों को सद्बुद्धि मिले, इसकी मंगल कामना की। 17 सिंबल नहीं मिलना बड़ी लापरवाही बताया कांग्रेस के 16 सिंबल खारिज होने के सवाल पर पालीवाल ने कहा कि कांग्रेस को 17 सिंबल नहीं मिलना बहुत बड़ी लापरवाही थी। उन्होंने महेश सोनी को लेकर आरोप लगाया कि वह खुद को कांग्रेस का कथित पदाधिकारी बताता है, जबकि उसका शहर कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं है। पालीवाल के अनुसार वह शहर कांग्रेस के कार्यक्रमों में भी कभी मौजूद नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद महेश सोनी सिंबल लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और वहां लड़ाई-झगड़े के बाद दोपहर 3:30 बजे निर्वाचन अधिकारी के सामने सिंबल देने गया। 17 प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ पाए, महापौर-उपमहापौर भी मैदान में नहीं उतरे पालीवाल ने कहा कि इस लापरवाही के चलते कांग्रेस को सिंबल नहीं मिले और 17 प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ पाए। उन्होंने कहा कि शहर के कांग्रेस प्रत्याशी ओम नारायणीवाल को सिंबल देने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट गए। इसके चलते कांग्रेस को 17 सिंबल खोने का खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ओर से महापौर और उपमहापौर पद के प्रत्याशी भी मैदान में नहीं उतारे गए। इसके चलते भारतीय जनता पार्टी के दोनों प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। पालीवाल ने इसे कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी स्थिति बताया। बोले- पार्टी में अपनी बात रखने का सभी को हक पार्टी में अनुशासनहीनता के सवाल पर पालीवाल ने कहा कि उन्होंने किसी तरह की अनुशासनहीनता नहीं की है। कांग्रेस पार्टी में सभी को अपनी बात रखने का हक है और उन्होंने भी अपनी बात शीर्ष नेताओं तक पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि अब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।