हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटते हुए खुली जेल से फरार हुए देवी सिंह को पुलिस ने रविवार (11 अक्टूबर) को बिसाऊ बस स्टैंड से पकड़ लिया। वह 14 जून 2016 को झुंझुनूं की खुली जेल से फरार होने के बाद बेंगलुरु की एक पेपर मिल में मजदूरी कर रहा था। करीब 10 साल 4 महीने तक वह आम मजदूर की तरह रहा और परिवार से फोन पर संपर्क में भी बना रहा, लेकिन पुलिस की पकड़ में नहीं आया। 10 अक्टूबर को उसके गांव महनसर आने की सूचना मिलने पर झुंझुनूं कोतवाली और बिसाऊ थाना पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन बिसाऊ बस स्टैंड पर मौजूद होने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। देवी सिंह को 2007 में अपने ही गांव के धीर सिंह शेखावत की लाठी से पीटकर हत्या करने के मामले में 2010 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जागरण से लौटते समय हुआ था विवाद, लाठी से पीटकर की थी हत्या मामला 23 दिसंबर 2007 की रात का है। महनसर निवासी देवी सिंह रात करीब 11:30 बजे जागरण से लौट रहा था। रास्ते में उसे अपने ही गांव और मोहल्ले का धीर सिंह शेखावत मिल गया। दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर गाली-गलौज शुरू हो गई। धीर सिंह के पास लाठी थी। इसी दौरान देवी सिंह ने उसी लाठी से उसके साथ मारपीट कर दी। घटना के बाद वह धीर सिंह को वहीं छोड़कर घर चला गया और सो गया। दूसरी ओर, ग्रामीण धीर सिंह को हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई। अगली सुबह मौत का पता चला, दो-तीन दिन में गिरफ्तार हुआ अगली सुबह देवी सिंह को भी धीर सिंह की मौत का पता चल गया। पुलिस ने घटना के दो-तीन दिन के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और सुनवाई शुरू हुई। हत्या के इस मामले में करीब तीन साल तक मुकदमा चला। 2010 में उम्रकैद, 2016 में खुली जेल से फरार 23 अप्रैल 2010 को अदालत ने देवी सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद उसे बीकानेर जेल भेज दिया गया, जहां वह सजा काट रहा था। जेल में आचरण ठीक रहने के कारण वर्ष 2016 में उसे झुंझुनूं की खुली जेल में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, वहां आने के कुछ समय बाद ही उसने फरारी का रास्ता चुन लिया। 14 जून 2016 को वह खुली जेल से भाग गया। जेल प्रहरी ने दर्ज करवाई थी रिपोर्ट देवी सिंह के फरार होने के बाद जेल प्रहरी बद्रीप्रसाद ने 17 जून 2016 को झुंझुनूं कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। फरारी के मामले में उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। बेंगलुरु की पेपर मिल में करने लगा था काम खुली जेल से फरार होने के बाद देवी सिंह बेंगलुरु चला गया और वहां एक पेपर मिल में काम करने लगा। पुलिस के अनुसार, लंबे समय तक उसके बारे में कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस दौरान वह अपने परिवार के संपर्क में बना रहा। करीब 10 साल 4 महीने तक फरार रहने के बाद उसके गांव आने की सूचना पुलिस तक पहुंची। चुनाव के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने इस सूचना को गंभीरता से लिया और उसकी तलाश शुरू की। 10 अक्टूबर को मिली सूचना, अगले दिन बिसाऊ बस स्टैंड पर पकड़ा 10 अक्टूबर को पुलिस को देवी सिंह के महनसर गांव आने की सूचना मिली। इसके बाद झुंझुनूं कोतवाली के एएसआई बलबीर चावला, कॉन्स्टेबल विजेंद्र और कुलदीप ने बिसाऊ थाना पुलिस के साथ मिलकर उसकी तलाश शुरू की। रविवार को बिसाऊ बस स्टैंड पर उसके मौजूद होने की जानकारी मिली। बिसाऊ थानाधिकारी उमाशंकर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पूछताछ में उसकी पहचान महनसर निवासी देवी सिंह पुत्र शीशपाल के रूप में हुई। पुलिस ने उसे डिटेन किया और बाद में झुंझुनूं कोतवाली पुलिस को सौंप दिया।