नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए सोमवार को हुए मतदान के दौरान भाजपा के नवनिर्वाचित पार्षद ओमप्रकाश चौधरी ने उन्हें जानबूझकर मतदान से वंचित रखने का गंभीर आरोप लगाया है। मतदान का समय समाप्त होने के बाद शाम करीब 6 बजे पुलिस थाने पहुंचे ओमप्रकाश चौधरी ने पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी। ओमप्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि वे भाजपा के सच्चे सिपाही हैं और भाजपा के पक्ष में ही मतदान करना चाहते थे, लेकिन उन्हें मतदान का मौका नहीं दिया गया। विधायक से फोन पर उनकी बात हुई थी। उनके अनुसार विधायक ने संगठन की बात मानने और उन्हें नगर पालिका उपाध्यक्ष बनाए जाने की बात कही थी। चौधरी का कहना है कि उन्होंने मतदान से वंचित नहीं रखने और स्वयं मतदान करने की बात कही। चौधरी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने वहां मौजूद लोगों की बात नहीं मानी तो करीब 8-10 बाउंसरों की मदद से उन्हें होटल के कमरे में जबरन बंद कर दिया गया। उनका मोबाइल फोन भी पहले ही प्रभारी द्वारा ले लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मतदान का समय निकलने के बाद करीब 2:30 बजे होटल से बाहर निकाला गया, जिससे वे मतदान केंद्र तक पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। करीब 13 दिन की बाड़ाबंदी के दौरान उन्हें मतदान से दूर रखने की स्थिति बनाई गई। चौधरी ने विधायक पर उन्हें कथित रूप से प्रलोभन दिए जाने का भी आरोप लगाया। ओमप्रकाश चौधरी ने कहा कि वे भाजपा से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं और उनका उद्देश्य मतदान प्रक्रिया में भाग लेना था। उनके आरोपों पर संबंधित विधायक और भाजपा संगठन का पक्ष सामने नहीं आया है।