जयपुर नगर निगम की सत्ता में भाजपा का दबदबा एक बार फिर कायम रहा। सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए लगातार सातवीं बार नगर निगम में अपना बोर्ड बना लिया। 1994 में पहली बार चुनाव हुए थे। यानी​ पिछले 32 साल से भाजपा का ही बोर्ड है। इस बार 150 वार्डों वाले निगम में 146 वार्डों के नतीजे घोषित हुए हैं। इनमें भाजपा ने 78 वार्ड जीतकर बहुमत के लिए जरूरी 76 का आंकड़ा पार कर लिया। कांग्रेस के खाते में 53 और निर्दलीयों के पास 15 वार्ड गए हैं। वार्ड 9, 18, 25 और 34 के परिणाम ईवीएम खराब होने के कारण फिलहाल अटके हुए हैं। इन चार वार्डों के नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन इससे बोर्ड बनाने की तस्वीर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भाजपा घोषित परिणामों में ही स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी है। मेयर बदला, लेकिन बोर्ड नहीं जयपुर नगर निगम की राजनीति में भाजपा की पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सात बोर्ड लगातार उसके खाते में गए हैं। बीच में 2009 में मेयर के सीधे चुनाव हुए थे। तब कांग्रेस से ज्योति खंडेलवाल मेयर बनी थी। लेकिन बोर्ड भाजपा का बना था। तब जयपुर निगम में 77 वार्ड थे। भाजपा के 47, कांग्रेस के 25 और 5 निर्दलीय जीते थे। 2020 में दो निगम बने तो हेरिटेज में कांग्रेस ने निर्दलीयों के साथ बोर्ड बनाया, लेकिन साढ़े तीन साल बाद सरकार बदलते ही भाजपा बोर्ड बन गया। यानी एक बार बोर्ड बना वो भी अधूरा। सांगानेर ने दी सबसे बड़ी ताकत विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो भाजपा को सबसे बड़ी बढ़त सांगानेर से मिली। यहां 21 में से 15 वार्ड भाजपा ने जीते। विद्याधर नगर में 12 और मालवीय नगर में 10 वार्ड भाजपा के खाते में आए। हवामहल में 8, झोटवाड़ा में 7 और किशनपोल में 6 वार्ड जीतकर पार्टी ने बोर्ड के लिए जरूरी संख्या जुटाई। कांग्रेस ने आदर्श नगर में 10 और बगरू में 8 वार्ड जीतकर अपनी मजबूती दिखाई। सिविल लाइंस में मुकाबला बराबरी पर रहा।