कृषि विभाग ने बूंदी में मंगलवार से एफएफएस (फर्टिलाइजर फॉर सेल) व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए दुकानों के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े होने से राहत दिलाना है। इस डिजिटल प्रणाली के तहत किसान मोबाइल एप के माध्यम से घर बैठे उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग पूरी होने के बाद किसानों को 48 घंटे की वैधता वाला टोकन या क्यूआर कोड मिलेगा। इस टोकन का उपयोग करके किसान अपने नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों को उर्वरक की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा और वितरण प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित होगी। एफएफएस व्यवस्था उर्वरक की मांग, उपलब्धता, बुकिंग और वितरण प्रक्रिया को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाती है। यह उर्वरक स्टॉक की प्रभावी निगरानी में मदद करेगी और किसानों को उपलब्धता और वितरण संबंधी जानकारी आसानी से मिलेगी। इसके माध्यम से अनुदानित उर्वरक के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी। सिरोही और राजसमंद जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू राज्य में एफएफएस व्यवस्था को सबसे पहले सिरोही और राजसमंद जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अब चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों में विस्तारित किया जा रहा है। पायलट चरण में लगभग 78 हजार किसानों को 12 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया गया था। बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिलों में अब लागू द्वितीय चरण में बूंदी के साथ-साथ चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू जिलों में 25 अगस्त से एफएफएस व्यवस्था लागू की जा रही है। आगामी चरणों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस डिजिटल व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। व्यवस्था के शुभारंभ के अवसर पर मंगलवार को बडानयागांव स्थित जोगणिया कृषि सेवा केंद्र पर किसानों को एफएफएस ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। इस दौरान अशोक कुमार शर्मा अतिरिक्त निदेशक कृषि खंड कोटा, राजेश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), बूंदी सत्यैन्द्र पाठक, उप निदेशक कृषि खण्ड कोटा, उमाशंकर शर्मा, सहायक निदेशक कृषि कोटा खण्ड प्रवीन्द्र राणा, सीएफसीएल प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।