भास्कर न्यूज| बूंदी नगर परिषद चुनाव में टिकट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के भीतर दावेदारों की संख्या ने पार्टी नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। बूंदी नगर परिषद के 60 वार्डों में पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए भाजपा से 311 और कांग्रेस से 138 कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए आवेदन किया है। यानी भाजपा में एक वार्ड के लिए औसतन 5 से अधिक और कांग्रेस में 2 से ज्यादा दावेदार मैदान में हैं। अब दोनों दलों में टिकट चयन को लेकर मंथन शुरू हो गया है। वार्डों में दावेदारी के साथ ही पार्टी नेताओं के सामने जातिगत समीकरण, पिछले चुनाव का प्रदर्शन, संगठन में सक्रियता और जीतने की क्षमता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर प्रत्याशी तय करने की चुनौती है। बड़ी संख्या में आवेदन आने से टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदर असंतोष की स्थिति भी बन सकती है। ग्राउंड स्तर पर दावेदार अपने समर्थकों के साथ पार्टी नेताओं तक पहुंच बना रहे हैं। कई वार्डों में एक ही पार्टी से कई मजबूत दावेदार होने से टिकट किसे मिलेगा, इसे लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी चर्चा है। अब सबकी नजर पार्टी की ओर से जारी होने वाली सूची पर है। टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार चुनाव मैदान में उतरते हैं तो इसका सीधा असर दोनों प्रमुख दलों के अधिकृत प्रत्याशियों पर पड़ सकता है। भाजपा जिलाध्यक्ष रामेश्वर मीणा ने बताया कि कार्यकर्ताओं को टिकट मांगने का हक है। पार्टी किसी एक को ही टिकट देती है, इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई विरोधी हो जाएगा। एकजुट होकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में काम करेंगे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष महावीर मीणा ने कहा कि टिकट वितरण नियमानुसार ही हो रहा है। टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय उतरकर बिगाड़ेंगे समीकरण टिकट के लिए आवेदन करने वाले 449 दावेदारों में से अधिकांश को पार्टी का टिकट नहीं मिल पाएगा। ऐसे में टिकट से वंचित दावेदारों के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने का विकल्प रहेगा। मजबूत जनाधार वाले बागी मैदान में उतरे तो वे पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोट काट सकते हैं। इसका असर जीत-हार के समीकरण पर पड़ेगा। इसलिए दोनों दल टिकट वितरण के साथ ही असंतुष्ट दावेदारों को मनाने की रणनीति पर भी काम करेंगे।