आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में कैंसर मरीजों को मुफ्त रेडिएशन (सेंक) देने वाली 6 करोड़ की टेली थैरेपी (कोबाल्ट) मशीन पिछले 15 दिन से बंद पड़ी है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि 1.31 करोड़ रुपए का बिल बकाया होने के कारण मेंटेनेंस कंपनी काम करने नहीं आ रही। वहीं, राज्य सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेजों के यूजी फंड के इस्तेमाल पर रोक लगाने से बिल का भुगतान अटका हुआ है। कैंसर पीड़ितों को रोजाना रेडिएशन थैरेपी की जरूरत होती है। औसतन एक मरीज को 35 बार सेंक लगवाना पड़ता है। मशीन में हाल ही 1.31 करोड़ रुपए की लागत से कोबाल्ट सॉर्स डलवाया गया था। निजी कंपनी का मई से भुगतान नहीं हुआ, इसलिए अब वह मशीन दुरुस्त करने नहीं आ रही। असल में, बिल का भुगतान मेडिकल कॉलेज के अंडर ग्रेजुएट (यूजी) फंड से होना है। कॉलेज के पास फंड है, लेकिन सरकार ने इससे किसी भी तरह के खर्च के लिए जयपुर (मुख्यालय) से पूर्व स्वीकृति का आदेश जारी कर रखा है। यानी जब तक राज्य सरकार से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक कॉलेज प्रशासन एक रुपया भी जारी नहीं कर सकता। फाइल जयपुर में अटकी हुई है। असर: मरीजों को जेब से खर्च करने पड़ रहे 20 हजार से 1.20 लाख रु. सरकारी अस्पताल में यह थैरेपी निशुल्क है। जिन मरीजों का चिरंजीवी या आयुष्मान कार्ड नहीं बना है, मशीन बंद होने से उन्हें पूरा खर्च खुद उठाना पड़ रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में रेडिएशन का खर्च 20 हजार से लेकर 1 लाख 20 हजार रुपए तक आता है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज का यूजी फंड सरकारी आवंटन, छात्रों की फीस, ओपीडी-आईपीडी आय और रिसर्च ग्रांट से बनता है। इसका उपयोग कॉलेज की लैब, अस्पताल की दवाइयों के लिए होता है। फाइल भेजी है, मंजूरी का इंतजार सरकार की स्वीकृति के लिए फाइल प्राचार्य कार्यालय के माध्यम से भेज दी गई है। वहां से मंजूरी मिलते ही कंपनी का काम करवाकर मशीन चालू करवा दी जाएगी। -डॉ. विपिन माथुर, अधीक्षक, एसएसएच