चाणक्य सेना ने आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर ‘आरक्षण न्याय आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। संगठन ने कहा है कि यह आंदोलन किसी वर्ग से आरक्षण छीनने के लिए नहीं, बल्कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचाने के लिए है, जो अब भी इससे अपेक्षित रूप से वंचित हैं। इसी वजह से संगठन ने ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बजाय इसे ‘आरक्षण न्याय आंदोलन’ नाम दिया है। चाणक्य सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय शर्मा ने बताया- पिछले करीब आठ दशकों में आरक्षण का लाभ कुछ जातियों और परिवारों तक ज्यादा पहुंचा है। जबकि SC, ST और OBC वर्गों में कई समुदाय अभी भी पीछे हैं। उन्होंने कहा अब आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर यह देखना जरूरी है कि इसका लाभ सभी पात्र और वंचित समुदायों को न्यायपूर्ण तरीके से मिल रहा है या नहीं। हर जिले में चलाएंगे अभियान अजय शर्मा ने बताया- चाणक्य सेना देशभर के जिलों में जनजागरूकता अभियान चलाएगी। कार्यकर्ता लोगों के बीच जाकर आरक्षण व्यवस्था में सुधार की जरूरत को लेकर जानकारी देंगे। इसके बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपकर आरक्षण व्यवस्था में जरूरी बदलाव और पुनरीक्षण की मांग की जाएगी। वंचित समुदायों को मिले ज्यादा अवसर संगठन की मांग है कि SC, ST और OBC के भीतर जो समुदाय अब तक अपेक्षित लाभ से दूर रहे हैं, उन्हें भी पर्याप्त अवसर मिलें। इसके लिए आरक्षण के लाभों के वर्गीकरण और प्रतिनिधित्व की स्थिति की समीक्षा करने की मांग की गई है। चाणक्य सेना का कहना है कि यह व्यवस्था केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।। बल्कि कॉलेजों में प्रवेश और आरक्षण से जुड़े दूसरे अवसरों में भी इसका लाभ न्यायपूर्ण तरीके से मिलना चाहिए। किसी के अधिकार छीनने की मांग नहीं चाणक्य सेना अध्यक्ष ने कहा- हाल में अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण और आरक्षण के लाभों के बंटवारे को लेकर न्यायिक स्तर पर भी चर्चा हुई है। इस पूरे विषय पर संविधान, सामाजिक स्थिति और न्यायिक फैसलों को ध्यान में रखते हुए समीक्षा होनी चाहिए। चाणक्य सेना ने साफ किया कि वह किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है और न ही किसी का अधिकार खत्म करने की मांग कर रही है। संगठन का उद्देश्य आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से वंचित लोगों तक पहुंचाना है।