नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा ने चित्तौड़गढ़ में युवा संवाद प्रोग्राम के जरिए चुनावी अभियान का पहला बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। मंच पर पूरे कार्यक्रम का फोकस युवाओं को संगठन की ताकत बताने, हर वार्ड तक पहुंचने और नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड बनाने पर रहा। लेकिन प्रोग्राम के बाद मीडिया से बातचीत में जब छात्रसंघ चुनाव बहाल करने का सवाल उठा तो भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा सीधे जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी पिछली कांग्रेस सरकार पर डालते हुए कहा कि मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है। वहीं निकाय चुनाव से जुड़े सवालों के जवाब में भी उन्होंने स्थानीय मुद्दों की बजाय पेपर लीक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं, कांग्रेस पर हमलों और राष्ट्रीय राजनीति पर ज्यादा बात की। इससे साफ संकेत मिला कि भाजपा निकाय चुनाव में सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि सरकार की उपलब्धियों और बड़े राजनीतिक मुद्दों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। युवाओं को बनाया चुनाव का सबसे बड़ा चेहरा युवा संवाद कार्यक्रम में शंकर गोरा ने कार्यकर्ताओं से कहा कि निकाय चुनाव में भाजपा की जीत की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि हर वार्ड, हर मोहल्ले और हर ढाणी तक पहुंचकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचानी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर कमल के फूल को जिताने की अपील की और कहा कि चित्तौड़गढ़ सहित पूरे राजस्थान के नगर निकायों में भाजपा का बोर्ड बनाना पार्टी का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि चुनाव सिर्फ उम्मीदवार नहीं जिताते, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत जीत दिलाती है। इसलिए हर युवा को संगठन का सक्रिय कार्यकर्ता बनकर मैदान में उतरना होगा। उन्होंने दावा किया कि युवाओं का भरोसा भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर है और यही भरोसा चुनाव में भी दिखाई देगा। छात्रसंघ चुनाव पर सवाल आया तो कोर्ट का हवाला प्रोग्राम के बाद मीडिया ने जब छात्रसंघ चुनाव बहाल करने को लेकर सवाल पूछा तो शंकर गोरा ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव सबसे पहले कांग्रेस सरकार ने बंद किए थे। भाजपा सरकार बनने के बाद कई यूनिवर्सिटी से राय मांगी गई थी। अधिकांश यूनिवर्सिटी ने सेमेस्टर व्यवस्था का हवाला देते हुए चुनाव कराना उचित नहीं बताया। इसके बाद कुछ छात्र अदालत चले गए और अब मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत का फैसला नहीं आता, सरकार कोई फैसला नहीं ले सकती। अदालत का फैसला आने के बाद सरकार सकारात्मक रूप से आगे का कदम उठाएगी। हालांकि भाजपा सरकार का कार्यकाल तीन साल पूरा होने के करीब है, लेकिन छात्रसंघ चुनाव कब होंगे, इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई। निकाय चुनाव में भी राष्ट्रीय मुद्दों को बनाया हथियार शंकर गोरा के बयान में एक बात साफ दिखाई दी कि भाजपा निकाय चुनाव में केवल स्थानीय समस्याओं के भरोसे चुनाव नहीं लड़ना चाहती। मीडिया से बातचीत में उन्होंने पेपर लीक, विपक्ष की राजनीति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और युवाओं के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय बार-बार पेपर लीक हुए, जिससे युवाओं का भविष्य खराब हुआ। भाजपा सरकार बनने के बाद पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और बड़ी संख्या में आरोपियों को जेल भेजा गया। उन्होंने दावा किया कि अब तक बड़ी संख्या में परीक्षाएं कराई जा चुकी हैं और कोई पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी कड़े कानून, फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष व्यवस्था बनाकर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास किया है। उनके पूरे बयान में स्थानीय निकायों की समस्याओं की तुलना में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के राजनीतिक मुद्दे ज्यादा प्रमुख रहे। कांग्रेस पर हमला, डोटासरा और गहलोत को घेरा शंकर गोरा ने अपने संबोधन और मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस पर लगातार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में बार-बार पेपर लीक होने से लाखों युवाओं की मेहनत बेकार हुई। उन्होंने कहा कि गांव का किसान, मजदूर और गरीब परिवार अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए संघर्ष करता है, लेकिन पेपर लीक होने से उनकी उम्मीद टूट जाती है। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को छात्रसंघ चुनाव बंद करने के लिए जिम्मेदार बताया। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर भी हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने वीर तेजाजी महाराज को लेकर गलत टिप्पणी की है और उन्हें इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। शक्ति प्रदर्शन के सवाल पर संगठन की एकजुटता का दावा प्रोग्राम के दौरान कुछ नेताओं की सक्रियता को जिला अध्यक्ष पद की दावेदारी से जोड़कर देखे जाने के सवाल पर भी शंकर गोरा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा में शक्ति प्रदर्शन की संस्कृति नहीं है। पार्टी में कार्यकर्ता तैयार किए जाते हैं और सभी लोग विचारधारा के आधार पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कहीं शक्ति प्रदर्शन दिखाई देता है तो वह कांग्रेस में है, जहां अलग-अलग नेताओं के अपने-अपने समूह हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा संगठन पूरी तरह एकजुट है और निकाय चुनाव में सभी कार्यकर्ता मिलकर पार्टी को जीत दिलाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार का गुटबाजी का माहौल नहीं है।