राजस्थान क्रिकेट में तीन नए जिलों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। खुद प्रशासक भास्कर ए. सावंत को भी समझ नहीं आ रहा कि क्या करना है? तीन दिन में तीन नए जिलों को लेकर तीन फैसले हुए। क्यों नहीं बनाई जा रही क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी? जब तक आरसीए की चयनित बॉडी नहीं बनती, तब तक क्रिकेट कराने के लिए प्रशासक पूर्व क्रिकेटर्स की एक एडवाइजरी कमेटी क्यों नहीं बनाते? राजस्थान क्रिकेट से संबंधित सभी निर्णय क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी बनाकर उसे दे देने चाहिए। वैसे भी आरसीए की वोटर लिस्ट में अचानक जुड़े इन तीन जिलों को लेकर पहले दिन से विवाद सामने आ रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लगी हुई हैं। वोटर लिस्ट में नाम होने के बावजूद इन तीनों जिलों ने आरसीए चुनाव में मतदान नहीं किया था। हालांकि एजीएम में इन तीनों जिलों के प्रतिनिधि जरूर शामिल हुए थे। साफ है कि राजस्थान क्रिकेट संघ में चयनित बॉडी नहीं होने के कारण इस तरह के फैसले हो रहे हैं। 29 सितंबर को चुनाव भी हो गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रिजल्ट जारी नहीं किया गया और मतपेटी सीलबंद कर ट्रेजरी में रख दी गई है। अब कोर्ट का फैसला आने के बाद ही आरसीए की चयनित बॉडी बनेगी। फैसला कब तक आता है, इसका सभी को इंतजार है। भास्कर एक्सपर्ट - विनोद माथुर, पूर्व रणजी कप्तान फैसले नहीं होने से राजस्थान क्रिकेट की छवि​ धूमिल हो रही हर रोज फैसले बदल रहे हैं। इस तरह के निर्णय राजस्थान क्रिकेट की छवि को धूमिल करते हैं। जब तक चयनित बॉडी नहीं बनती, तब तक क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी बने, जो क्रिकेट से संबंधित सारे निर्णय ले।