जिले के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भारी झटका लगा है। नगर निगम के साथ-साथ जिले की छह नगर पालिकाओं में भी भाजपा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। नगर निगम में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल कर बोर्ड पर कब्जा जमा लिया है जबकि छह में से चार पालिकाओं में भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी है। नगर निगम के 80 वार्डों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं भाजपा 27 सीटों पर सिमट कर रह गई। रालोपा को 1 और 10 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। दिग्गजों के वार्डों में हारी भाजपा: बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी के वार्ड 14 से पूर्व मेयर सुशीला कंवर राजपुरोहित चुनाव हार गईं। हालांकि केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के मूल वार्ड 6 और पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास के मूल वार्ड 59 में भाजपा ने जीत दर्ज की लेकिन शहर भाजपा अध्यक्ष सुमन छाजेड़ के वार्ड 47 में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। नगर पालिका : देशनोक में कांग्रेस, लूणकरणसर-खाजूवाला में भाजपा लूणकरणसर (35 वार्ड): भाजपा ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को 11 और एक निर्दलीय को जीत मिली। खाजूवाला (20 वार्ड): भाजपा ने 11 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा छुआ, जबकि कांग्रेस को 8 और एक निर्दलीय को जीत मिली। देशनोक (25 वार्ड): कांग्रेस ने 15 सीटों पर कब्जा जमाया और पूर्ण बहुमत हासिल किया। भाजपा मात्र 7 जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय जीते। नोखा (45 वार्ड): यहाँ सीपीआई (एम) समर्थित विकास मंच ने 29 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया। भाजपा यहां 13 और निर्दलीय 3 सीटों पर सिमट गए। श्रीडूंगरगढ़ (40 वार्ड): यहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस 15 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि भाजपा को 13, विकास मंच को 9, सीपीआई (एम) को 1 और 2 निर्दलियों को जीत मिली है। नापासर (25 वार्ड): यहां त्रिशंकु जैसी स्थिति रही, जिसमें भाजपा ने 10 वार्डों में जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस को 7, निर्दलियों को 6 और आरएलपी को 2 सीटों पर सफलता मिली। बीकानेर पूर्व: भाजपा का पारंपरिक गढ़ और कांग्रेस की सेंधमारी पूर्व विधानसभा सीट पर भाजपा का मजबूत आधार एक बार फिर नजर आया। भाजपा ने यहां सामान्य वर्ग की 11 और सामान्य महिला वर्ग की 2 सीटों पर जीत दर्ज की, जो इस क्षेत्र में उसके पारंपरिक जनाधार को पुख्ता करती है। हालांकि भाजपा को ओबीसी (एक पुरुष, एक महिला) और एससी वर्ग (एक पुरुष, एक महिला) से सफलता मिली। कांग्रेस ने सामान्य वर्ग की 7 और सामान्य महिला वर्ग की 4 सीटों के साथ सवर्ण मतदाताओं में अपनी पैठ मजबूत की। सबसे बड़ा उलटफेर ओबीसी और एससी वर्ग के मोर्चे पर रहा जहां कांग्रेस ने ओबीसी की 5 और एससी की 3 सीटों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस ने केवल सामान्य सीटों पर ही नहीं, बल्कि आरक्षित और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच भी भाजपा की तुलना में कहीं अधिक सीटें जीतकर अपनी सियासी जमीन को व्यापक किया है। बीकानेर पश्चिम: कांग्रेस का आक्रामक विस्तार पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में निर्णायक रहे। यहां कांग्रेस ने सामान्य वर्ग की 11 और सामान्य महिला वर्ग की 6 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके अलावा ओबीसी पुरुष (2), ओबीसी महिला (1), एससी पुरुष (1) और एससी महिला (2) पदों पर जीत हासिल कर पार्टी ने सर्वस्पर्शी जीत का संदेश दिया। दूसरी ओर पश्चिम में भाजपा का प्रदर्शन मुख्य रूप से सामान्य सीटों (4 सामान्य, 3 सामान्य महिला) तक सिमट कर रह गया। ओबीसी (एक पुरुष, एक महिला) और एससी (1) वर्ग में भाजपा को सीमित सीटें ही मिल सकीं। लब्बोलुआब यह है कि इस चुनाव में कांग्रेस ने रणनीति बदलते हुए न केवल सामान्य सीटों पर फोकस किया बल्कि ओबीसी और एससी वर्ग के मतदाताओं को भी मजबूती से अपने पाले में खींचा।