दौसा नगर परिषद में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर रहने के कारण निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में किंगमेकर की भूमिका में होंगे। 55 वार्डों के सभी नतीजे सामने आ चुके हैं। कांग्रेस ने 24 सीटें, भाजपा ने 17 और निर्दलीयों ने 14 सीटें जीती हैं। बोर्ड बनाने के लिए 28 सीटों का बहुमत चाहिए। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से 4 और भाजपा 11 सीट दूर है। दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए अब निर्दलीयों का समर्थन अहम हो गया है। कांग्रेस के लिए बोर्ड बनाना आसान, लेकिन निर्दलीयों का समर्थन जरूरी 24 सीटों के साथ कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के सबसे करीब है। उसे बोर्ड बनाने के लिए सिर्फ 4 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस ने निर्दलीयों से संपर्क साधने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। भाजपा को ज्यादा निर्दलीयों की जरूरत भाजपा 17 सीटों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी बनी है। उसके सामने बहुमत के लिए 11 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। पार्टी ने भी बोर्ड बनाने को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। निकाय प्रभारी पूजा कपिल ने वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किया है और आगामी रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा की नजर भी 14 निर्दलीय पार्षदों पर है। रिजल्ट के बाद पीजी कॉलेज पहुंचे थे भाजपा नेताओं के वाहन रिजल्ट जारी होने के बाद भाजपा नेताओं के कई वाहन पीजी कॉलेज परिसर पहुंचे थे। उस समय अनुमान लगाया जा रहा था कि निर्दलीय उम्मीदवारों को बाड़ाबंदी के लिए ले जाया जा सकता है। हालांकि पुलिस सुरक्षा के बीच निर्दलीयों को उनके घर पहुंचाया गया। अब दोनों ही पार्टियां निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने के सियासी गुणा-भाग में जुटी हैं। 48 घंटे में तय होगा सभापति का समीकरण नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए 15 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 16 सितंबर नामांकन की आखिरी तारीख है। ऐसे में दोनों प्रमुख पार्टियों के पास बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए महज 48 घंटे का वक्त है। कांग्रेस को 4 और भाजपा को 11 पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में अगले दो दिन दौसा नगर परिषद की सियासत के लिए अहम रहने वाले हैं। कांग्रेस में तीन दावेदार दौसा नगर परिषद के पिछले कार्यकाल में कांग्रेस की ममता चौधरी सभापति रही थीं। इससे पहले करीब 10 साल तक भाजपा के राजकुमार जायसवाल सभापति रहे। अब कांग्रेस की ओर से नेता कन्हैयालाल सैनी की पुत्रवधु सुनीता सैनी, रेखा गुर्जर और रसाल देवी को सभापति पद का दावेदार माना जा रहा है। भाजपा में भी तीन नाम चर्चा में भाजपा की ओर से पूर्व पार्षद अरविंद गुर्जर की पत्नी कविता गुर्जर, पूर्व सभापति राजकुमार जायसवाल की पत्नी राधा जायसवाल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष पूरण सैनी की परिजन कुसुम सैनी प्रबल दावेदारों में हैं। अब पार्टी के सामने सभापति पद के लिए नाम तय करने के साथ ही निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की चुनौती है।