निगम चुनावों की आचार संहिता लगने से पहले जनाना हॉस्पिटल की नई बिल्डिंग को आनन-फानन में शुरू तो कर दिया, लेकिन प्रसूताओं की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। पुरानी और नई बिल्डिंग के बीच मरीजों और परिजनों की चक्करघिन्नी हो रही है। डिलीवरी नई बिल्डिंग में होती है, जबकि ब्लड टेस्ट के लिए परिजनों को सैंपल पुरानी बिल्डिंग में ले जाकर जमा कराने पड़ते हैं। वहीं जनाना में करोड़ों की बिल्डिंग बनने के बाद भी एक बेड पर दो-दो महिलाओं को रखा जा रहा है। इससे इंफेक्शन का खतरा भी बना रहता है। यहां पर रोज ओपीडी और आईपीडी करीब 1100 मरीजों की होती है। मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए जनाना की नई बिल्डिंग में 300 की जगह 400 बेड लगाए गए हैं। पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत कराई जाएगी। -डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्रिंसिपल एसएमएस 319 बेड स्वीकृत, पुरानी में 550 बेड थे जनाना हॉस्पिटल में नया आईपीडी टावर करीब 52 करोड़ रुपए में बना है। इसका उद्घाटन 18 अगस्त 2026 को किया गया। यह पुरानी बिल्डिंग से करीब 250 मीटर दूर है। पुरानी बिल्डिंग में 550 बेड थे, जबकि नई बिल्डिंग में 319 बेड स्वीकृत हैं। डिलीवरी के सभी केस नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए हैं। इससे पुरानी बिल्डिंग की तुलना में यहां बेड की संख्या कम पड़ रही है। वार्डों में एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इस संबंध में जनाना हॉस्पिटल की अधीक्षक डॉ. नूपुर लोरिया से बात की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। टेस्ट के लिए भी भटक रहे मरीज नई बिल्डिंग में डिलीवरी के केस शिफ्ट किए गए हैं, जबकि ओपीडी पुरानी बिल्डिंग में होती है। ब्लड टेस्ट लैब और ब्लड बैंक भी पुरानी बिल्डिंग में ही हैं। नई बिल्डिंग में भर्ती मरीजों के ब्लड सैंपल परिजनों को पुरानी बिल्डिंग में आकर जमा कराने पड़ते हैं। कई बार मरीजों को भी आना पड़ता है। सोनोग्राफी दोनों बिल्डिंग में हो रही है। वेटिंग एरिया नहीं होने से मरीजों के परिजन फर्श पर बैठे रहते हैं और हॉल भरे हुए हैं। दोनों बिल्डिंगों के बीच छाया के लिए टीन शेड लगाया जा रहा है।