DFO कार्यालय में सरकारी रसीदों और वित्तीय लेनदेन को लेकर एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं। टेंडरों की धरोहर राशि के नाम पर नकद वसूली और सरकारी खाते में राशि जमा नहीं होने के मामले के बाद अब आरा मशीनों के नवीनीकरण शुल्क की वसूली का मामला सामने आया है। प्रदेश में वर्ष 2020 से आरा मशीनों के नवीनीकरण पर रोक है। इसके बावजूद संचालकों से नवीनीकरण शुल्क लेकर सरकारी GA-55 रसीदें जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। डिस्टिक फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) काव्या बी ने रसीदें कार्यालय से जारी होने की पुष्टि करते हुए जांच शुरू करवाई है। नकद राशि लेकर जारी की गईं GA-55 रसीदें प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई आरा मशीन संचालकों से नकद राशि ली गई। इसके बदले कार्यालय की ओर से GA-55 सरकारी रसीदें जारी की गईं। इन रसीदों पर सहायक वन संरक्षक (ACF) के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। इससे रसीद जारी करने की प्रक्रिया और उसमें शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। 2020 से नवीनीकरण पर रोक लगी है इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रदेश में 2020 से आरा मशीनों के नवीनीकरण पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद आरा मशीन संचालकों से नवीनीकरण शुल्क वसूला गया और उन्हें सरकारी GA-55 रसीदें जारी की गईं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकार ने नवीनीकरण प्रक्रिया पर रोक लगा रखी थी, तब कार्यालय ने किस कानूनी प्रावधान के तहत यह शुल्क वसूला। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि संचालकों से वसूली गई राशि सरकारी खाते में जमा हुई या नहीं। LDC पर रसीदें काटने का आरोप पूरे मामले में स्टोर इंचार्ज और कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद गुर्जर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उन्हीं के माध्यम से नकद राशि लेकर GA-55 रसीदें काटी गईं। हालांकि इन रसीदों पर ACF के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी खाते में जमा हुई राशि या नहीं? इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि आरा मशीन संचालकों से नवीनीकरण शुल्क लिया गया तो क्या पूरी राशि सरकारी खजाने में जमा कराई गई। यदि राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हुई तो यह सरकारी राजस्व के गबन का मामला बन सकता है। वहीं नवीनीकरण पर रोक के बावजूद शुल्क वसूले जाने का भी जांच में पता लगाया जा रहा है। DFO ने माना- कार्यालय से जारी हुईं रसीदें उपवन संरक्षक (DFO) काव्या बी ने स्वीकार किया कि संबंधित GA-55 रसीदें कार्यालय से जारी हुई हैं। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच बैठा दी गई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। DFO काव्या बी ने बताया- जांच की जा रही है कि GA-55 रसीदों के जरिए कितनी राशि वसूली गई, यह राशि किस लिए ली गई और इसमें से कितनी राशि सरकारी खाते में जमा हुई। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सरकारी राजस्व में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। DFO ने कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच स्टोर इंचार्ज एवं कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद गुर्जर के लगातार कार्यालय से अनुपस्थित रहने की जानकारी भी सामने आई है। मामले की जांच के बीच उनकी अनुपस्थिति भी चर्चा में है।