धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व (डीकेटीआर) के विरोध में सरमथुरा में चल रहा आंदोलन मंगलवार को 14वें दिन भी जारी रहा। इस विरोध प्रदर्शन में धौलपुर के साथ-साथ करौली जिले से भी बड़ी संख्या में किसान, युवा और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार हजारों लोगों की उपस्थिति ने आंदोलन की ताकत को प्रदर्शित किया। अठैसा, भांकरी और चंदेलीपुरा सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण स्वेच्छा से धरने में शामिल हुए। आंदोलन को करौली के कमांड एरिया के सभी गांवों से जोड़ने की भी घोषणा की गई, जिससे इसकी पहुंच और व्यापक हो गई। डीकेटीआर का आधिकारिक कोर क्षेत्र 599.6406 वर्ग किलोमीटर है। बफर जोन की अधिसूचना के बाद धौलपुर के 60 और करौली के 48, कुल 108 गांव इससे प्रभावित हुए हैं। सरकारी जवाब के अनुसार इन गांवों की ग्राम सभाओं के साथ बफर नोटिफिकेशन को लेकर परामर्श की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बफर क्षेत्र में गांवों का पुनर्वास स्वैच्छिक है। यह मुद्दा ही आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, क्योंकि ग्रामीण विस्थापन का विरोध कर रहे हैं। धरना स्थल पर रघुवीर मीना ने सेंचुरी और टाइगर रिजर्व से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विस्थापन एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है और जंगल व जमीन पर निर्भर स्थानीय समुदायों के अधिकारों को ध्यान में रखना आवश्यक है। मीना ने ग्रामीणों से अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। युवा नेता अर्जुन महर ने कहा कि ग्रामीणों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार से रोजगार और विकास के अवसर बढ़ाने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि विस्थापन का संकट खड़ा हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मनोज मीना ने इस लड़ाई को किसी एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा बताया। वहीं, मदन मोहन मीना ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया और ग्रामीणों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।