धौलपुर नगर परिषद चुनाव की मतगणना पूरी होते ही अब सभापति की कुर्सी के लिए सियासी जोड़-तोड़ तेज हो गई है। 60 वार्डों में कांग्रेस के 27, भाजपा के 11, बसपा के 3 और निर्दलीय 19 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। सभापति बनाने के लिए 31 पार्षदों का बहुमत जरूरी है। ऐसे में कांग्रेस को चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है, जबकि भाजपा 11 पार्षदों के बावजूद निर्दलीय और अन्य पार्षदों को साथ लाकर सत्ता तक पहुंचने की रणनीति में जुटी है। सभापति पद का चुनाव 21 सितंबर को होगा। 21 सितंबर को मतदान, इसी दिन आएगा परिणाम उप जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश राव ने सभापति चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके अनुसार 16 सितंबर को नामांकन दाखिल होंगे, 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 18 सितंबर को नामांकन वापसी के बाद उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए मतदान होगा। मतदान के बाद इसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाएगा। प्रमाण पत्र के लिए बाड़ाबंदी से बाहर आए पार्षद सभापति चुनाव में मतदान करने से पहले सभी निर्वाचित पार्षदों के लिए जीत का प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। इसी वजह से मतगणना के दूसरे दिन बड़ी संख्या में विजेता पार्षद बाड़ाबंदी से बाहर निकलकर प्रमाण पत्र लेने एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उप जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेश राव ने निर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाई और निर्वाचन प्रमाण पत्र वितरित किए। भाजपा में गिरीश गर्ग और कमलजीत के नाम चर्चा में सभापति पद को लेकर भाजपा में कई नाम सामने आ रहे हैं। गिरीश कुमार गर्ग ने सभापति पद के लिए नामांकन फार्म खरीदा है। वहीं, वार्ड नंबर 57 से विजयी निर्दलीय उम्मीदवार कमलजीत का नाम भी सभापति की दौड़ में बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा इनमें से किसी एक को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बना सकती है। कांग्रेस में आकाश कुशवाहा और सत्यदेव कंसाना पर चर्चा कांग्रेस की ओर से वार्ड नंबर 8 से निर्वाचित आकाश कुशवाहा के नाम के साथ पूर्व सभापति कमल कंसाना के परिजन सत्यदेव कंसाना को भी सभापति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी अंतिम नाम की घोषणा नहीं की गई है। 19 निर्दलीय और 3 बसपा पार्षदों पर नजर सभापति चुनाव में सबसे अहम भूमिका 19 निर्दलीय और 3 बसपा पार्षदों की हो सकती है। कांग्रेस 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है और उसे बहुमत के लिए चार पार्षदों का समर्थन चाहिए। दूसरी ओर भाजपा के पास 11 पार्षद हैं, इसलिए उसके सामने बहुमत तक पहुंचने के लिए निर्दलीय और अन्य पार्षदों को अपने पाले में लाने की बड़ी चुनौती है। दोनों दलों ने अपने-अपने पार्षदों को साधने की कवायद शुरू कर दी है। अब नजर इस बात पर है कि 21 सितंबर को 31 का जादुई आंकड़ा कौन सा खेमे पूरा करता है और धौलपुर नगर परिषद की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगती है।