नगर परिषद चुनाव के नतीजों के बाद अब डीडवाना सभापति की कुर्सी को लेकर सियासी जोड़तोड़ तेज हो गई है। 40 वार्डों वाली नगर परिषद में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस के 16, भाजपा के 9, आरएलपी का 1 और 14 निर्दलीय पार्षद जीतकर आए हैं। बहुमत के लिए 21 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में सभापति पद के लिए होने वाले चुनाव में 14 निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में रहेंगे। सभापति का पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है। मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई, लेकिन पहले दिन किसी भी उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल नहीं किया। 16 सितंबर तक नामांकन, 21 को होगा फैसला चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सभापति पद के लिए 16 सितंबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि उम्मीदवार 18 सितंबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 21 सितंबर को सभापति पद के लिए मतदान होगा। निर्वाचित पार्षद सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नगर परिषद में मतदान करेंगे। मतदान समाप्त होते ही मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। बहुमत से दूर दोनों बड़े दल चुनाव परिणाम ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में 16 सीटों पर है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी 5 सीट दूर है। भाजपा के पास 9 पार्षद हैं, जबकि आरएलपी को एक सीट मिली है। दूसरी ओर 14 निर्दलीय पार्षदों की संख्या इतनी है कि उनका समर्थन किसी भी खेमे के लिए सभापति की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता आसान कर सकता है। बाड़ेबंदी के बीच उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस सभापति चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों के साथ निर्दलीय पार्षदों की भी बाड़ेबंदी की गई है। हालांकि, अब तक कांग्रेस और भाजपा ने सभापति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। ऐसे में दोनों दलों की रणनीति और उम्मीदवार चयन पर निगाहें टिकी हुई हैं। निर्दलीयों के रुख पर टिकी निगाहें डीडवाना में सभापति चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यही है कि 14 निर्दलीय पार्षद किस खेमे के साथ जाएंगे। कांग्रेस और भाजपा के सामने एक ओर अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की कवायद भी करनी होगी। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि दोनों प्रमुख दल किस चेहरे पर दांव लगाते हैं और निर्दलीय पार्षद किसके पक्ष में खड़े होते हैं। यही समीकरण 21 सितंबर को सभापति की कुर्सी का फैसला तय करेगा।