डूंगरपुर नगर परिषद चुनाव को लेकर शहर की सियासत चरम पर है। निकाय चुनाव की सरगर्मियों के बीच सभी राजनीतिक दलों में टिकट पाने की होड़ मची हुई है। सबसे दिलचस्प मुकाबला भाजपा के खेमे में देखने को मिल रहा है, जहां इस बार केवल नेताओं की सिफारिश नहीं, बल्कि कड़े मापदंड और सीक्रेट सर्वे ही उम्मीदवार तय करेंगे। डूंगरपुर नगर परिषद के कुल 40 वार्डों में चुनावी बिगुल बजते ही दावेदारों की कतारें लंबी हो गई हैं। अब तक भाजपा संगठन के पास 250 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने चुनाव लड़ने के लिए अपने दावे ठोके हैं। लेकिन इस बार बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी गॉडफादर या सिफारिशी चिट्ठी के आधार पर टिकट का वितरण नहीं होगा। टिकट वितरण को निष्पक्ष बनाने के लिए संगठन ने एक त्रिस्तरीय कसौटी तैयार की है। जिला संगठन प्रभारी वीरेंद्र सिंह चौहान, चुनाव प्रभारी वंदना मीणा और जिला अध्यक्ष अशोक पटेल की मौजूदगी में आवेदनों की बारीकी से स्क्रूटनिंग की जा रही है। दावेदारों को टिकट के लिए 3 पैमानों से गुजरना होगा भाजपा में पार्षद का टिकट पाने के लिए दावेदारों को उससे पहले कई परीक्षाओं से गुजरना होगा। स्क्रीनिंग के बाद बनेगा 3-3 दावेदारों का पैनल स्क्रीनिंग की यह प्रक्रिया सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। जिला स्तर पर स्क्रूटनिंग पूरी होने के बाद हर वार्ड से सबसे मजबूत 3-3 दावेदारों का एक-एक पैनल तैयार किया जाएगा। यह पैनल पहले संभाग स्तर पर और फिर अंतिम मुहर के लिए प्रदेश नेतृत्व को भेजा जाएगा। प्रदेश स्तर से हरी झंडी मिलने के बाद ही प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा होगी।