राजस्थान क्रिकेट संघ की चुनावी बिसात बिछ चुकी है। करीब 29 माह आरसीए में एडहॉक का राज रहा। अब 29 सितंबर को चुनाव होने है। चुनाव अधिकारी की ओर से जारी की गई फाइनल वोटर और कैंडिडेट लिस्ट के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। तीन दिन में कार्यकारिणी सदस्य के रूप में दौसा जिला क्रिकेट संघ की अध्यक्ष शोभना गुर्जर का ही नामांकन हुआ है। अब सिर्फ एक दिन बचा है। शनिवार को नामांकन की गहमागहमी नजर आ सकती है। इस बार चुनाव में सबसे दिलचस्प बात तीन नए जिलों बालोतरा, खैरथल-तिजारा और डीडवाना-कुचामन का जुड़ना है। ये तीन जिले बिना एजीएम और एग्जीक्यूटिव कमेटी में पास हुए ही जुड़ गए। 5 अप्रैल 2024 को जयदीप बिहाणी के कन्वीनर रहते हुई एग्जीक्यूटिव कमेटी और 5 सितंबर 2025 को डीडी कुमावत के कन्वीनर रहते हुए एजीएम में नए जिलों को मान्यता नहीं दिए जाने का निर्णय हो चुका है। हालांकि ये डॉक्यूमेंट आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान चुनाव अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराए गए। सहायक चुनाव अधिकारी पीएस हाडा ने भी कहा था कि इन जिलों को हटाने को लेकर एग्जीक्यूटिव कमेटी या एजीएम में जो निर्णय हुए थे, उसके मिनट्स हमें उपलब्ध नहीं कराए गए। अगर चुनाव हुए तो इन तीनों संघों को वोट निर्णायक होंगे 5 सितंबर 2025 के एजेंडा नंबर 12 पर चर्चा के बाद समिति ने पूर्व पदाधिकारियों की ओर से जारी संबद्धता प्रमाण पत्र रद्द करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। एजीएम में बताया गया था कि आरसीए के पूर्व सचिव भवानी शंकर सामोता नए जिला संघों को व्यक्तिगत स्तर पर संबद्धता प्रमाण पत्र जारी किए थे। यहां तक कि पूर्व आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत खुद भी सचिव भवानी सामोता के फैसले से सहमत नहीं थे। इन मामलों को न तो एग्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष रखा गया और न ही जनरल बॉडी की बैठक में मंजूरी ली गई। प्रस्ताव में कहा गया कि 2023-24 और 2024-25 में जनरल बॉडी की बैठक ही आयोजित नहीं हुई। ऐसे में एजीएम में इन संबद्धता प्रमाण पत्रों को अनधिकृत बताते हुए तत्काल जिलों की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया गया था। एजीएम में सभी 33 जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि और एडहॉक कमेटी सदस्य उपस्थित थे। इसके मिनट्स पर सभी के हस्ताक्षर भी हैं। इसी तरह 5 अप्रैल 2025 की कार्यकारिणी में भी नए जिलों को संबद्धता नहीं दिए जाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था। फिर भी वोटर लिस्ट में इन जिलों को जोड़ दिया गया।चुनाव अधिकारी को इस एजीएम के मिनट्स ही उपलब्ध नहीं कराए गए। एग्जीक्यूटिव कमेटी और एजीएम के जो मिनट्स चुनाव अधिकारी को नहीं मिले उन्हें भास्कर आपके सामने ला रहा है। दोनों ही मीटिंग के मिनट्स भास्कर के पास उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं आरसीए के एक बाबू ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिन दोनों मीटिंग में नए जिलों की संबद्धता रद्द करने के निर्णय लिए गए थे इन दोनों ही मीटिंग के मिनट्स मिसिंग नहीं है। आरसीए में उपलब्ध हैं। हाईकोर्ट में सुनवाई सोमवार को, सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका इस मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई है। इस संबंध में आरसीए और चुनाव अधिकारी को भी पार्टी बनाया गया है। इतना ही नहीं इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में भी एक एसएलपी लगी हुई है। ये तीन नए जिले वोटर लिस्ट में जुड़े रहेंगे या नहीं, इसका फैसला अब कोर्ट से ही होगा। इस संबंध में पहले भी हाई कोर्ट और डबल बेंच में सुनवाई हो चुकी है। इस दौरान ईसी और एजीएम के सारे रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वैभव गहलोत के अध्यक्ष रहते जुड़े थे ये जिले नए जिले वैभव गहलोत के कार्यकाल में जोड़े गए थे। तब भवानी सामोता आरसीए सचिव थे। उन्होंने बिना एजीएम के ही संबद्धता दी थी। आज तक न तो इन जिलों के चुनाव हुए हैं और न ही इन जिलों की कोई क्रिकेट टीम किसी भी एज ग्रुप में पिछले तीन साल में खेली है। इतना ही नहीं स्पोर्ट्स काउंसिल के रिकॉर्ड में भी इन जिलों की जानकारी नहीं है। जिस एजीएम या एग्जीक्यूटिव मीटिंग में नए जिलों की मान्यता रद्द करने का फैसला हुआ था, उस एजीएम के मिनट्स हमें आरसीए की तरफ से उपलब्ध ही नहीं कराए गए।’ -पीएस हाडा, सहायक चुनाव अधिकारी