उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी (PCSO) संतराम मीणा ने बुधवार को प्रधान कार्यालय और जोधपुर मंडल के वरिष्ठ संरक्षा अधिकारियों के साथ फलोदी रेलवे स्टेशन का संरक्षा सेफ्टी ऑडिट निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रेल संचालन से जुड़े विभिन्न संरक्षा पहलुओं का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। फलोदी यार्ड में पॉइंट एवं क्रॉसिंग का गहन परीक्षण किया निरीक्षण के दौरान प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी ने फलोदी यार्ड में पॉइंट एवं क्रॉसिंग का गहन परीक्षण किया, उनकी कार्यप्रणाली और संरक्षा मानकों की जांच की। इसके अतिरिक्त, पैनल रूम, स्टेशन परिसर, स्टेशन कक्ष और रेलवे फाटक सहित विभिन्न स्थानों पर संरक्षा व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया। सेफ्टी ऑडिट में ट्रेन संचालन, सिगनलिंग, विद्युत, इंजीनियरिंग, दूरसंचार और अन्य संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध व्यवस्थाओं की स्थिति का जायजा लेते हुए संरक्षा मानकों के निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। फाटक संख्या 49 का भी PCSO ऑडिट टीम द्वारा गहन निरीक्षण किया मारवाड़ लोहावट–हरलाया रेलखंड में समपार फाटक संख्या 49 का भी PCSO ऑडिट टीम द्वारा गहन निरीक्षण किया गया। यहां सुरक्षा एवं संरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और कार्यरत रेलकर्मी से संरक्षा नियमों की जानकारी ली गई। इसके बाद भीकमकोर स्टेशन पर स्थित 132/25 के.वी. कर्षण उपकेंद्र में टेस्टिंग रूम और बैट्री रूम का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद इस निरीक्षण के दौरान प्रधान कार्यालय से सीईएलई हिमांशु शर्मा, सीईटीपी के.के. गुप्ता, सीएसटीई प्रोजेक्ट संजीव दीक्षित और डिप्टी सीएसओ इंजी. प्रदीप मीणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय से वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी रामनिवास जाट, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक लोकेश कुमार, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता महेंद्र कुमार, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर जोगेंद्र मीणा, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर दूरसंचार अनुपम कुमार, मंडल इंजीनियर संजय पुनिया और सहायक मंडल संरक्षा अधिकारी सुनील दत्त सहित संरक्षा से जुड़े अधिकारी, पर्यवेक्षक एवं रेलकर्मी भी मौजूद रहे। संरक्षा अधिकारी ने बताया कि इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य रेल संचालन में संरक्षा मानकों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना तथा संभावित संरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर उनका समयबद्ध निराकरण करना था।