भास्कर न्यूज | कुस्तला कृषि विज्ञान केंद्र, सवाईमाधोपुर की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (तिलहन) योजनांतर्गत तिल की उन्नत किस्म आरटी-372 पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन ग्राम कुस्तला में किया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों ने भाग लिया और तिल की उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। केंद्र की शस्य वैज्ञानिक डॉ. नूपुर शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत जिले में तिल की उन्नत किस्म आरटी-372 के प्रथम पंक्ति प्रदर्शन किसानों के खेतों पर किए जा रहे हैं। इसके तहत 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 50 कृषकों के खेतों को प्रदर्शन के लिए चयनित किया गया है। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य किसानों को उन्नत किस्म और वैज्ञानिक खेती की तकनीक से जोड़कर तिल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार करना है। उन्होंने बताया कि आरटी-372 वर्ष 2019 में विकसित तिल की उन्नत किस्म है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी औसत उपज 7 से 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त हो सकती है। यह किस्म पर्ण कुंचन रोग के प्रति प्रतिरोधी बताई गई है तथा लगभग 85 से 95 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। कम अवधि में तैयार होने के कारण यह किसानों के लिए फसल चक्र की दृष्टि से भी उपयोगी साबित हो सकती है। कार्यक्रम में ग्राम कुस्तला के किसान गजानंद जाट, हीरालाल माली सहित 50 से अधिक कृषक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के शकील अहमद एवं दलहन तकनीकी सहायक सुनील मीणा ने किया। संतुलित पोषण और समय पर खरपतवार नियंत्रण जरूरी डॉ. नूपुर शर्मा ने किसानों को तिल की उन्नत किस्म के साथ संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, समय पर खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं व्याधि प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल उन्नत बीज का उपयोग पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल की पूरी अवधि में वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने से ही बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से प्रक्षेत्र प्रदर्शनों से प्राप्त तकनीकी जानकारी और अनुभवों को आसपास के अन्य किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक कृषक उन्नत तिल उत्पादन तकनीक का लाभ उठा सकें।