बीकानेर के राजनीतिक रण में इस बार दलों की टिकट वितरण नीति ने चुनावी नतीजों की पूरी तस्वीर बदल दी है। कांग्रेस की तुलना में भाजपा से सामान्य वर्ग को ज्यादा उम्मीदें थीं क्योंकि कांग्रेस अपनी पारंपरिक रणनीति के तहत सामान्य सीटों पर मुस्लिम और ओबीसी उम्मीदवारों को उतारती रही है। हालांकि इस बार जब भाजपा ने भी सामान्य सीटों पर ओबीसी चेहरों पर दांव खेला तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। पूर्व विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने 8 सामान्य सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिसका खामियाजा पार्टी को 4 सीटों पर हार कर भुगतना पड़ा। यही स्थिति बीकानेर पश्चिम में भी देखने को मिली जहां 8 सामान्य सीटों पर 2 मुस्लिम और 6 ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट दिए गए। नतीजतन भाजपा को इस क्षेत्र की 6 सीटों पर पराजय झेलनी पड़ी। साफ है कि सामान्य वर्ग के मतदाताओं ने अपनी सीटों पर अन्य वर्गों को उम्मीदवार बनाए जाने पर खुलकर नाराजगी जाहिर की जिसने दोनों ही दलों के सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया। ये प्रयोग बाहर से आए भाजपा के प्रभारी जो खुद ओबीसी वर्ग से आते हैं उनका है और भाजपा को मुंह की खानी पड़ी।