प्रदेश में सरकारी अस्पतालों और दवा वितरण केन्द्रों पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता और एक्ट की पालना का दावा किया जा रहा है, जबकि नियमित भर्ती की रफ्तार धीमी है। पिछले 15 साल में सरकार ने महज 5754 नियमित फार्मासिस्ट पदों पर भर्ती की है। मेडिकल शिक्षा और चिकित्सा विभाग के अधीन संचालित अस्पतालों में दवाओं के स्टोरेज, वितरण एवं पेशेंट काउंसलिंग के लिए करीब 14 हजार फार्मासिस्टों की जरूरत है। राजस्थान स्टेट फार्मेसी काउंसिल में हर साल डिप्लोमा एवं डिग्री करके 30 हजार रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पंजीकृत फार्मासिस्टों की संख्या 76,115 पहुंच चुकी है। 38 अमृत फार्मेसी स्टोर खोलने की स्वीकृति, जगह नहीं मिलने से अटका मामला आरयूएचएस से संबद्धता प्राप्त 330 संस्थानों में डी-फार्मा के 294 कॉलेजों में 17,340 सीटें और डिग्री के 36 संस्थानों में 2580 सीटें हैं। मेडिकल शिक्षा और चिकित्सा विभाग में करीब 14 हजार फार्मासिस्ट चाहिए, जबकि 5754 पदों पर ही भर्ती की है। एसएमएस जयपुर, आरयूएचएस, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, पाली समेत 60 सरकारी संस्थानों के लिए 225 दवा वितरण केन्द्रों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिली है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन 4147 डीडीसी संचालित हैं। केन्द्र ने प्रदेश में सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध को जयपुर के एसएमएस, आरयूएचएस, जयपुरिया, गणगौरी अस्पताल, कावंटिया स्थित अस्पतालों समेत 34 जन औषधि केन्द्र और कम कीमत में इंप्लांट और उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 38 अमृत फार्मेसी स्टोर खोलने की स्वीकृति दी है। लेकिन जगह चिह्नित नहीं होने और किराए के मामले को लेकर यह अटका हुआ है। डिप्लोमा-डिग्री संस्थान 300 पार जयपुर समेत प्रदेश में डिप्लोमा और डिग्री कराने वाले संस्थानों की संख्या 300 के पार हो चुकी है। उसके हिसाब से नियमित फार्मासिस्ट पदों पर भर्ती नहीं हो रही है। काउंसिल की ओर से भी भर्ती करने के लिए लिखा है। -महावीर सोगानी, अध्यक्ष, राजस्थान स्टेट फार्मेसी काउंसिल