डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। उसकी 21 दिन की फरलो मंजूर हुई है। मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला। उसके काफिले में दो लैंड क्रूजर, दो फॉर्च्यूनर, दो इनोवा और दो पुलिस एस्कॉर्ट वाहन शामिल थे। सुबह करीब 8 बजे वह सिरसा स्थित डेरे में पहुंचा। राम रहीम को अगस्त 2017 में साध्वियों से यौन शोषण के मामले में सजा हुई थी। 9 साल में यह 17वीं बार है, जब वह पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आया है। इस साल जनवरी में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। इसके बाद 26 मई को 30 दिन की पैरोल दी गई। 30 दिन की पैरोल पूरी करने के बाद वह 25 जून को सुनारिया जेल वापस लौटा था। उधर, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने राम रहीम के बार-बार जेल से बाहर आने पर सवाल उठाए हैं। कहना है कि राज्य स्तर पर राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो देकर राहत पहुंचाई जा रही है। यह सारी चीजें कहीं न कहीं सवाल खड़े करती हैं। अकाल तख्त ने भी राम रहीम की फरलो पर आपत्ति जताई है। जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा, लंबे समय से जेल में बंद 'बंदी सिंहों' को रिहाई नहीं मिल रही, जबकि राम रहीम को बार-बार रिहा किया जा रहा है। तीन मामलों में सजा हुई, दो में बरी हो चुका बार-बार जेल से बाहर आने पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने उठाए सवाल… पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि सरकारें अपनी मनमर्जी कर रही हैं। आप देखिए, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दो मर्डर के मामले थे- रणजीत सिंह मर्डर केस, छत्रपति मर्डर केस। दोनों मामलों में गुरमीत राम रहीम को बरी किया। छत्रपति हत्याकांड में आज तक सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में SLP लेकर नहीं गई, अपील में भी नहीं गई। दूसरा यह कि जिस तरीके से स्टेट लेवल पर गुरमीत राम रहीम को बार-बार फायदा पहुंचाया जा रहा है पैरोल का, फरलो का। मैं यह कहूंगा कि ये आज की बात नहीं है। जो भी राजनीतिक दल सत्ता में रहा, सभी ने गुरमीत राम रहीम की कमजोरियों का फायदा उठाया। गुरमीत राम रहीम को इन आपराधिक मामलों से अपनी जान बचानी थी और सत्ताधारी पार्टियों को, राजनीतिक पार्टियों को अपनी राजनीतिक रोटियां सेकनी थीं। पिछले 20-22 सालों से यह राजनीतिक ड्रामा चल रहा है। सभी राजनीतिक पार्टियों का चरित्र यही रहा है। अब भी जो सत्ता में हैं या सत्ता से बाहर बैठे हैं, राम रहीम को लेकर कभी किसी ने सवाल खड़ा नहीं किया। कोई इलेक्शन आता हैं तो अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए राम रहीम को बाहर भेजा जाता है। तो यह सारी चीजें कहीं न कहीं सवाल खड़े करती हैं। इस पर मैं यही कहूँगा कि जो भी राजनीतिक दल हैं, उनको बिल्कुल इन मामलों में सोचना चाहिए। राम रहीम की फरलो पर अकाल तख्त की आपत्ति राम रहीम को 21 दिन की फरलो पर अकाल तख्त ने आपत्ति जताई है। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा, बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में दोषी राम रहीम को बार-बार रिहा किया जा रहा है, जबकि लंबे समय से जेल में बंद और सजा पूरी कर चुके ‘बंदी सिंहों’ को रिहाई नहीं मिल रही। उन्होंने जगतार सिंह हवाला को बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल नहीं दिए जाने का भी मुद्दा उठाया। SGPC सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बार ने कहा- इससे देश में ‘दो तरह के कानून’ होने का संदेश जाता है। क्या होती है पैरोल-फरलो, जिन पर राम रहीम बाहर आता है...