आईआईटी जेईई 2026 में भी आईआईटी बॉम्बे टॉपर्स की पहली पसंद रहा। टॉप 100 में 68 और टॉप-500 तक रैंक वाले 183 छात्रों ने यहां दाखिला लिया। कंप्यूटर साइंस टॉपर्स की पहली पसंद है। टॉप-500 में 365 (73%) छात्रों ने अलग-अलग आईआईटी में इसी कोर्स में दाखिला लिया। सर्वाधिक 142 छात्रों ने आईआईटी-बॉम्बे को चुना। सिविल इंजीनियरिंग में टॉप 500 में से केवल 2 (0.4%) छात्रों ने दिलचस्पी दिखाई। आईआईटी-जेईई 2026 की जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैंक 1 शुभम सहित टॉप-10 में आने वाले 5 छात्रों ने आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया। लड़कियों में टॉपर आरोही देशपांडे (रैंक 77) भी आईआईटी-दिल्ली पहुंचीं। 23 आईआईटीज में से पुराने 7 पर भरोसा कायम है। टॉप-5000 रैंक लाने वालों में से 2,460 छात्रों ने इन्हीं संस्थानों में दाखिला लिया। बॉम्बे में 764, दिल्ली में 587, खड़गपुर में 482, मद्रास में 477, कानपुर में 454, रुड़की में 411 और गुवाहाटी में 285 छात्रों ने दाखिला लिया। टॉप-500 में किसी ने जोधपुर नहीं चुना टॉप-5000 छात्रों ने चुने ये टॉप 11 कोर्स टॉपर्स ने कहां लिया दाखिला भास्कर एक्सपर्ट- प्रो. वी. रामगोपाल, पूर्व निदेशक, IIT दिल्ली; कुलपति, बिट्स पिलानी समूह बिना रिस्क लिए ट्रेंड अपना रहे देश में ट्रेंड बन जाता है तो उसे बदलने में वक्त लगता है। बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर, खड़गपुर सहित पुराने आईआईटीज की फैकल्टी, बुनियादी सुविधा और स्तर में कमी नहीं है, लेकिन टॉपर को बॉम्बे में ही दाखिला लेना है। छात्र रिस्क नहीं लेना चाहते। उन्हें लगता है कि पहले के टॉपर ने भी सोच-समझकर ही वहां दाखिला लिया होगा। टॉप-7 आईआईटी में यह बदलता रहता है। कभी खड़गपुर व कानपुर के लिए भी ऐसा ट्रेंड था, फिर दिल्ली के लिए बना। सीएसई जैसी ब्रांच में टॉप-1000 रैंक वालों को दाखिला नहीं मिलता तो वे बिट्स पसंद करते हैं। कोर कोर्स जैसे सिविल, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल ब्रांच में कम दिलचस्पी की वजह पहला सैलरी पैकेज है। सीएस का औसत पैकेज 30 लाख मिलता है तो सिविल में इसके आधे से भी कम का होता है। हालांकि अनुभव बढ़ने पर दोनों ट्रेड का कॅरिअर बराबर हो जाता है। सवालों का ट्रेंड- इस बार जेईई एडवांस कितनी कठिन थी?