जिले में फ्री गेहूं लेने के लिए अमीर और संपन्न परिवार अंत्योदय परिवार (अत्यंत गरीब) बन गए। एपीएल श्रेणी के 1104 परिवारों की श्रेणी बदलकर अंत्योदय अन्न योजना में कर दी गई और एक साल से अधिक समय में पोस मशीनों से 463 मीट्रिक टन गेहूं उठा लिया। इनमें कई तो आयकर दाता हैं। दैनिक भास्कर ने 15 दिन इन्वेस्टिगेशन कर इन परिवारों का पता लगाया और जिला प्रशासन को जानकारी दी। इसके बाद प्रशासन अब ऐसे सभी फर्जी लाभार्थियों से 27.50 रुपए प्रति किलो की दर से गेहूं की वसूली करेगा। दरअसल, खाद्य सुरक्षा योजना लागू होने के बाद अंत्योदय योजना में नए नाम जोड़ना बंद किया जा चुका है। इसके बावजूद झालावाड़ जिले में पिछले एक साल में बड़ी संख्या में नए नाम जोड़े जाते रहे और अंत्योदय योजना में प्रति व्यक्ति 35 किलो गेहूं उठाया गया। नियमानुसार पुराने अंत्योदय परिवारों में मृत लाभार्थियों के नाम हटने के बाद लाभार्थियों की संख्या कम होनी चाहिए थी, लेकिन इसका उलट हुआ। भास्कर ने खाद्य सुरक्षा पोर्टल पर इस असामान्य बढ़ोतरी की पड़ताल की। इस पर कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने भी रसद विभाग के अधिकारियों की टीम बनाकर जांच करवाई तो 1104 लोगों की श्रेणी एपीएल से अंत्योदय में बदले जाने की पुष्टि हुई। जांच में 8 ई-मित्र केंद्रों और संविदा सूचना सहायक गौतम नागर की भूमिका सामने आई है। केंद्रों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। खानपुर क्षेत्र में सर्वाधिक 970 नाम जोड़े सबसे ज्यादा 970 फर्जी नाम अकेले खानपुर क्षेत्र में जोड़े गए। ई-मित्र संचालक भरत मेहर के खाते से 286, जगदीश नायक के खाते से 193, शमशुन्निसा के खाते से 115, गजेंद्र कुमार सुमन के खाते से 73 और रामस्वरूप बैरवा के खाते से 68 नाम श्रेणी बदलकर जोड़े गए। भास्कर ने पोर्टल पर 1 साल का डेटा खंगाला भास्कर रिपोर्टर ने खाद्य सुरक्षा योजना पोर्टल पर एक साल का डेटा खंगाला। जिसके बाद यह घोटाला सामने आया। मामला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ तक पहुंचा तो उन्होंने रसद विभाग के ईओ गोविंद देथा को जांच दी। जांच में पता चला कि ई-मित्र केंद्रों ने अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग कर एपीएल परिवारों की श्रेणी बदलकर उन्हें अंत्योदय योजना में जोड़ दिया।