इंदिरा गांधी नहर के अंतिम छोर (जीरो हेड) तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से चल रहा किसानों का धरना शुक्रवार को समाप्त हो गया। प्रशासन और सिंचाई विभाग से लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। समझौते के अनुसार, शुरुआती दो दिन लगातार 3,000 क्यूसेक और इसके बाद एक सप्ताह तक 1,500 क्यूसेक पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। साथ ही नहर मार्ग पर पानी की चोरी रोकने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाने का भी भरोसा दिया गया है। अधिकारियों से वार्ता के बाद बनी सहमति शुक्रवार को जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में एसडीएम वीरेंद्रसिंह भाटी और एक्सईएन अनिल कुमार गर्ग धरना स्थल पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनरत किसानों से बातचीत की। इसके बाद बीकानेर स्थित सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी इंजीनियर विवेक गोयल से चर्चा कर पानी की आपूर्ति को लेकर समाधान निकाला गया। किसान नेताओं के अनुसार, क्षेत्रीय विधायक छोटूसिंह भाटी और विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद पानी की आपूर्ति का फॉर्मूला तय किया गया। पहले दो दिन 3,000, फिर सात दिन 1,500 क्यूसेक पानी समझौते के तहत शुरुआती दो दिन नहर के टेल क्षेत्र तक लगातार 3,000 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जाएगा। इसके बाद आगामी सात दिनों तक 1,500 क्यूसेक पानी की नियमित आपूर्ति की जाएगी। किसानों ने बताया कि पानी की कमी की भरपाई के लिए तीन में से एक ग्रुप की व्यवस्था के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी है। पानी चोरी रोकने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाने का भरोसा वार्ता के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि नहर के रास्ते में होने वाली पानी की अवैध चोरी के कारण अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। इस पर प्रशासन ने नहर मार्ग पर पुलिस जवानों से नियमित गश्त करवाने का आश्वासन दिया, ताकि पानी के अवैध उठाव और चोरी पर रोक लगाई जा सके। तय समय पर पानी नहीं मिला तो फिर आंदोलन की चेतावनी आठ दिनों से जारी धरने में साहबान खान, ईशान भाटी, कैप्टन गोवर्धनसिंह, चंद्रवीरसिंह भाटी, हीराराम गोदारा, भंवरलाल जांदू, मुबारक नाचना, इमामुद्दीन, निहालदीन और कासम खान सहित सैकड़ों किसान शामिल रहे। किसानों ने कहा कि प्रशासन ने तय समयसीमा में आश्वासन के अनुसार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की, तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल सहमति बनने के बाद धरना समाप्त कर दिया गया है।