नगर परिषद चुनाव के नतीजों में कई रोचक और चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। कहीं पति चुनाव हार गए। पत्नी ने जीत दर्ज की। कहीं भाई-बहन ने अलग-अलग वार्डों से पार्षद बनकर राजनीतिक परिवार की पकड़ मजबूत की। वरिष्ठ नेताओं की हार। पुराने चेहरों की वापसी। इन घटनाओं ने चुनावी समीकरणों को बदल दिया। पति हारे, पत्नी ने जीत दर्ज की : वार्ड 52 से चौथी बार जीत के लिए चुनाव मैदान में उतरे अब्दुल मुजीब को इस बार हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनकी पत्नी जमीला वार्ड 54 से विजयी रहीं। ऐसे में एक ही परिवार में जीत और हार, दोनों का परिणाम देखने को मिला। भाई-बहन बने पार्षद : पूर्व पार्षद शाहिद सईद और उनकी बहन फरजाना सईद ने भी चुनाव में बाजी मारी। शाहिद सईद वार्ड 52 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजयी रहे। फरजाना सईद ने वार्ड 39 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। उल्लेखनीय है कि इनके पिता भी पार्षद रह चुके हैं। इस तरह परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में दोनों सफल रहे। पांचवीं बार जीत का सपना अधूरा : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शब्बीर अहमद पूर्व में चार बार पार्षद रह चुके हैं। इस बार उन्होंने पांचवीं जीत के लिए वार्ड 52 से चुनाव लड़ा। उन्हें सफलता नहीं मिली। उनका निवास इस वार्ड से काफी दूर है। इस कारण चुनावी समीकरण उनके पक्ष में नहीं बन सके। उनका स्वयं का वार्ड आरक्षित होने के कारण कांग्रेस ने उन्हें 52 नंबर से टिकट दिया। ओम पांडे चौथी बार पार्षद बने : भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश पांडे ने वार्ड 31 से जीत दर्ज कर चौथी बार पार्षद बनने में सफलता हासिल की। पिछले चुनाव में मैदान से दूर रहने के बाद इस बार उनकी वापसी हुई। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता।