इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट मंडरा रहा है। 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले आए 4 प्रमुख सर्वे में से 2 में विपक्षी खेमा आगे है, जबकि एक में दोनों खेमे बराबरी पर हैं और एक में नेतन्याहू का खेमा आगे है। किसी भी सर्वे में एक भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें मिलती नहीं दिख रहीं। ऐसे में चुनाव के बाद सत्ता की चाबी छोटे दलों के हाथ में जा सकती है। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी खेमे को कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए। चुनाव से पहले आए चार प्रमुख सर्वे में किसी भी खेमे को यह आंकड़ा मिलता नहीं दिख रहा। इजराइल में चुनाव से पहले लोगों की राय बंटी येरुशलम के महाने येहुदा बाजार में चुनावी पोस्टरों के बीच 76 साल के फल विक्रेता अब्राहम लेवी को भरोसा है कि नेतन्याहू फिर सरकार बनाएंगे। वे कहते हैं, ‘नेतन्याहू को अपना काम पूरा करना है।’ लेकिन इसी शहर की जाफा स्ट्रीट पर दुकानदार इल्डा की राय अलग है। उनका कहना है कि हमास के हमले की जिम्मेदारी नेतन्याहू को लेनी चाहिए। तेल अवीव के जाफा इलाके में रहने वाले तुर्गेमान भी बदलाव चाहते हैं। वे कहते हैं कि वे गादी आइजनकोट का समर्थन करेंगे। लोगों की ये अलग-अलग राय इजराइल के चुनावी माहौल को दिखाती हैं। यहां कुछ लोग नेतन्याहू को दोबारा मौका देना चाहते हैं, तो कुछ हमास के हमले के बाद सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। इजराइल में 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे। इसके बाद गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई में 74 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। करीब तीन साल बाद हो रहे इस चुनाव में सुरक्षा, हमास के हमले की जिम्मेदारी और नेतन्याहू का नेतृत्व बड़े मुद्दे हैं। हमास हमले में अपनों को खोने वाले परिवार भी बंटे 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में कई परिवारों ने अपने लोगों को खो दिया था। अब चुनाव में ऐसे परिवारों के बीच भी नेतन्याहू को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। किबुत्ज बेरी की मेराव के माता-पिता हमले में मारे गए थे। उनका मानना है कि जिस सरकार के कार्यकाल में इतना बड़ा हमला हुआ, उसे दोबारा सत्ता में नहीं आना चाहिए। वहीं, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की उम्मीदवार तालिक देश में मजबूत नेतृत्व चाहती हैं। इससे साफ है कि हमले के पीड़ितों के परिवार भी इस सवाल पर एकमत नहीं हैं कि अगली सरकार किसकी होनी चाहिए। फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का मुद्दा चुनावी बहस से दूर इस चुनाव में फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का मुद्दा प्रमुख यहूदी दलों की बहस में ज्यादा जगह नहीं पा रहा है। नेतन्याहू फिलिस्तीनी इलाकों पर इजराइल का सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखने के पक्ष में हैं। विपक्षी दल भी सुरक्षा के मामले में सख्त रुख रखते हैं। यानी नेतन्याहू का विरोध करने वाले सभी दल फिलिस्तीन के मुद्दे पर उनसे अलग राय नहीं रखते। सरकार बदलने की मांग के बावजूद सुरक्षा और फिलिस्तीन के भविष्य को लेकर बड़े दलों के बीच मतभेद सीमित दिखाई देते हैं। सर्वे के मुताबिक, विपक्षी मतदाताओं में 36% और अरब नागरिकों में 57% लोग दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करते हैं। इस व्यवस्था के तहत इजराइल और फिलिस्तीन दो अलग-अलग देश होंगे। सरकार बनाने में अरब पार्टियों और छोटे दलों की भूमिका अहम इजराइल में किसी भी खेमे को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में छोटे दल सरकार बनाने का समीकरण बदल सकते हैं। चुनाव के बाद नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों को सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। दिए गए अनुमानों के मुताबिक, कुछ छोटे दलों को 12 से 15 सीटें मिलने की संभावना है। इनमें राअम पार्टी को 5, संयुक्त अरब सूची को 7 से 9, ओफर विंटर की पार्टी को 5 और हेंडेल-जेलखा को 4 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। ----------------------------- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं:हमास हमले ने बदली देश की राजनीति 7 अक्टूबर 2023 को हमास के करीब 6 हजार लड़ाकों ने इजराइल पर हमला किया। लोगों को घरों और बंकरों में मारा गया, कई लोगों को जिंदा जला दिया गया और 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…