नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने श्रीनाथ गार्डन में कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए संगठन को एकजुट दिखाने की कोशिश की। सम्मेलन का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह रहा कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार प्रमोद सिसोदिया और पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत सार्वजनिक मंच पर साथ नजर आए। दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं के सामने एकजुट होकर चुनाव लड़ने का भरोसा दिलाया और कहा कि पार्टी में अब व्यक्तिगत मतभेदों की जगह संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। हालांकि सम्मेलन में पूर्व नगर परिषद सभापति संदीप शर्मा की दूरी भी साफ दिखाई दी। यही वजह रही कि मंच पर दिखी एकता के बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या यह मेल-मिलाप लंबे समय तक रहेगा या फिर यह सिर्फ नगर परिषद चुनाव तक की रणनीति है। सम्मेलन के दौरान सिसोदिया ने मंच से यह कहकर हल्का तंज भी कसा कि उन्होंने कई बार जाड़ावत को बुलाया, लेकिन वे कभी नहीं आए। बाद में उन्होंने इसे तंज मानने से इनकार करते हुए कहा कि अब समय एक साथ काम करने का है और गुटबाजी खत्म होनी चाहिए। लंबे समय बाद साथ आए दोनों नेता, कार्यकर्ताओं को दिया एकजुट रहने का संदेश सम्मेलन में प्रमोद सिसोदिया ने अपने संबोधन की शुरुआत ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल सोनी का धन्यवाद करते हुए की। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद उन्हें ब्लॉक कांग्रेस की बैठक में बुलाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार जिला कांग्रेस की बैठकों में पूर्व विधायक को आने का न्योता दिया था, लेकिन वे नहीं आए। इसके बाद उन्होंने साफ किया कि अब पुरानी बातों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का समय है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद चुनाव कांग्रेस के लिए बहुत जरूरी हैं और इसमें सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को मिलकर मेहनत करनी होगी। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार भी कई मतभेद होने के बावजूद कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था और बोर्ड बनाया था। इस बार तो सभी नेता एक मंच पर हैं, इसलिए परिणाम और बेहतर आने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी चयन का फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा और किसी भी कार्यकर्ता को टिकट मांगने से नहीं रोका जाना चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी क्षमता पर भरोसा होता है, इसलिए टिकट मांगना उसका अधिकार है, लेकिन टिकट मिलने के बाद पूरी कांग्रेस की जिम्मेदारी उस उम्मीदवार को जिताने की होती है। क्योंकि किसी एक उम्मीदवार की हार या जीत केवल उसकी नहीं बल्कि पूरी पार्टी की हार और जीत होती है। टिकट पर नहीं, चुनाव जीतने पर हो फोकस प्रमोद सिसोदिया ने कार्यकर्ताओं से साफ कहा कि टिकट वितरण को लेकर आपसी विवाद से पार्टी का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि जिस उम्मीदवार को कांग्रेस का चुनाव चिन्ह मिले, उसके पीछे पूरी ताकत से काम करना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत नाराजगी, गुटबाजी और मनमुटाव छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि इस चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल समझकर लड़ना होगा। उनका कहना था कि यदि कांग्रेस शहरों में मजबूत प्रदर्शन करती है तो इसका असर आगे पंचायत और विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। उन्होंने मंच से नेताओं को भी संदेश दिया कि जिन वार्डों में अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समाज की संख्या ज्यादा है, वहां स्थानीय कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिए। बड़े नेताओं को हर वार्ड से टिकट मांगने की बजाय संगठन मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव नेताओं का नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं का चुनाव होता है और कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत हैं। 'बर्फ पिघली है, अब गुटबाजी खत्म होनी चाहिए' सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत में प्रमोद सिसोदिया ने कहा कि लंबे समय से जो दूरी थी, वह अब खत्म होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता इस बात से खुश हैं कि सभी नेता एक साथ बैठे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने मंच से तंज कसा था तो उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ सच्चाई कही थी, किसी पर कटाक्ष नहीं किया। उन्होंने कहा कि बर्फ कभी न कभी पिघलनी ही थी और आज पिघल गई, यह अच्छी बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब जिला कांग्रेस जहां भी बैठक करेगी, सभी नेता एक-दूसरे के कार्यक्रमों में शामिल होंगे और गुटबाजी की चर्चा खत्म हो जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस एकजुटता का चुनावी असर क्या होगा, इसका जवाब जनता ही देगी। जाड़ावत ने भाजपा विधायक पर साधा निशाना, अपने कार्यकाल के विकास कार्य गिनाए पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने सम्मेलन को पूरी तरह राजनीतिक रंग देते हुए भाजपा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ में जो बड़े विकास काम दिखाई देते हैं, वे कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समय हुए हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बने पुल, सड़कें, चंदेरिया अंडरपास, पेयजल योजनाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं कांग्रेस सरकार की देन हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा विधायक तीसरी बार जीतने के बावजूद शहर को कोई नई दिशा नहीं दे पाए हैं। जाड़ावत ने कहा कि शहर में जहां भी जाओ, वहां कांग्रेस सरकार के विकास कामों के शिलालेख दिखाई देते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे चुनाव के दौरान जनता को इन कामों की याद दिलाएं और बताएं कि कांग्रेस सरकार ने चित्तौड़गढ़ के लिए क्या-क्या किया था। सम्मेलन से निकला संदेश, लेकिन परीक्षा चुनाव में होगी श्रीनाथ गार्डन का यह सम्मेलन केवल कार्यकर्ताओं की मीटिंग नहीं बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति का सार्वजनिक प्रदर्शन भी रहा। मंच पर प्रमोद सिसोदिया और सुरेंद्र सिंह जाड़ावत की मौजूदगी ने यह संकेत जरूर दिया कि पार्टी निकाय चुनाव में एकजुट होकर उतरना चाहती है। वहीं संदीप शर्मा की दूरी ने यह भी बता दिया कि अंदरूनी समीकरण अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। नेताओं ने एकता, संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत की बात जरूर की, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के समय सामने आएगी। क्योंकि कांग्रेस के कई वार्डों में एक से ज्यादा दावेदार हैं और टिकट बंटवारे के बाद ही यह साफ होगा कि मंच पर दिखाई गई एकजुटता जमीन पर भी कायम रहती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि कांग्रेस ने चुनावी अभियान की शुरुआत एकता के संदेश और भाजपा पर आक्रामक हमले के साथ कर दी है। आने वाले दिनों में इसी रणनीति के आधार पर पार्टी नगर परिषद चुनाव का पूरा चुनावी नैरेटिव तैयार करने की कोशिश करेगी।