जयपुर में बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर 2 करोड़ रुपए की साइबर ठगी कर ली। सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर ने पश्चिम बंगाल से आरोपी ललित विश्वास निवासी पश्चिम बंगाल को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ललित ने ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध कराई थी। इस खाते में 7 लाख रुपए जमा हुए थे। इसके बदले आरोपी ललित ने कथित तौर पर 70 हजार रुपए कमीशन लिया। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले में जयपुर निवासी परिवादिया ने 11 सितंबर को रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। परिवादिया के अनुसार- 17 अगस्त को एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताया और उनके खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद कथित एटीएस अधिकारियों के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया। दर्ज मामले के अनुसार- आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने और उनके बैंक खाते से संदिग्ध लेन-देन होने का डर दिखाया। पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजकर दंपती पर करीब 20 दिन तक वीडियो कॉल पर रहने का दबाव बनाया गया। गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर करवा ली गई। बैंक खाते के जरिए ठगी की रकम के लेन-देन में भूमिका एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया- आरोपी ललित विश्वास ने अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों को बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध कराने और ठगी की रकम के लेन-देन में मदद की। जांच में पता चला कि आरोपी द्वारा उपलब्ध करवाए गए बैंक खाते में 2 सितंबर को 7 लाख रुपए जमा हुए थे। इसके बदले उसने 70 हजार रुपए कमीशन लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने परिचित साहिब से बैंक खाते से संबंधित खाली चेक प्राप्त किया था। बाद में यह चेक असीम विश्वास और अतुन के मोबाइल नंबरों पर भेज दिया। पुलिस आरोपी की भूमिका और ठगी की रकम के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जांच कर रही है। सीडीआर और बैंक खातों की जांच से खुला मामला पुलिस ने प्रकरण में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), वॉट्सएप चैट, बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि बुजुर्ग दंपती से ठगी गई रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इन्हीं लेन-देन की कड़ियों की जांच करते हुए पुलिस आरोपी ललित विश्वास तक पहुंची।