जयपुर के आराध्य गोविंद देवजी मंदिर परिसर में मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 11 बजे भगदड़ मचने की मॉकड्रिल की गई। भगदड़ की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और राहत दल मौके पर पहुंचे। शुरुआत में भगदड़ की सूचना से मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में श्रद्धालुओं को पता चला कि यह पूरी कार्रवाई मॉकड्रिल का हिस्सा थी। इसके बाद उन्होंने राहत की सांस ली। इस दौरान 45 मिनट तक पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल ने मोर्चा संभाला। ऐसे हुई मॉकड्रिल सबसे पहले राजभोग की झांकी के दौरान टेंट गिरने और श्रद्धालु घायल होने की मॉकड्रिल हुई। लेकिन फायर फाइटिंग सिस्टम ही चालू नहीं हुआ। हाइड्रेंट के वॉल्व खोलने पर पानी का प्रेशर नहीं बना। इतना ही नहीं पंप हाउस पूरी तरह बंद मिला। सायरन और अनाउसमेंट फेल आपात स्थिति से निपटने के लिए सायरन और अनाउसमेंट के लिए अलार्म की व्यवस्था भी नहीं मिली। चार में से केवल तीन हूटर ही चालू पाए गए। वहीं, अनाउसमेंट सिस्टम भी ठप रहा। तालमेल की कमी पुलिस, चिकित्सा, नागरिक सुरक्षा और फायर ब्रिगेड की टीमों के रेस्पॉंस टाइम की जांच के दौरान विभिन्न विभागों के बीच आपसी समंवय और तालमेल का अभाव दिखा। आपात स्थिति से निपटने का किया अभ्यास थाना अधिकारी राकेश ख्यालिया ने बताया- कलेक्टर के आदेश पर यह मॉकड्रिल आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य मंदिर में अचानक भगदड़ जैसी आपात स्थिति पैदा होने पर पुलिस, बचाव दल और अन्य संबंधित विभागों की तैयारियों को परखना था। मॉकड्रिल के दौरान यह देखा गया कि किसी आपात स्थिति में संबंधित विभाग कितनी तेजी से मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हैं। साथ ही सभी टीमों के रिस्पॉन्स टाइम को भी नोट किया गया। एडीम साउथ युगांतर शर्मा ने कहा- मंदिर प्रबंधन को आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से पेश किए गए नक्शे और ड्रिल के निष्कर्ष पर पुलिस के साथ चर्चा कर अंतिम प्लान तैयार किया जाएगा।