राजस्थान हाईकोर्ट ने सफाई कर्मचारी को बर्खास्त करने के एक मामले में करीब ढाई साल से जवाब पेश नहीं करने पर जयपुर नगर निगम को 25 छायादार पेड़ लगाने के निर्देश दिए। साथ ही 10 हजार रुपए का हर्जाना भी लगा दिया। जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने साहुल कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान निगम कमिश्नर हाईकोर्ट में उपस्थित रहे। उन्होंने जवाब पेश नहीं होने पर अदालत से माफी मांगी और जल्द जवाब पेश करने का आश्वासन भी दिया। हाईकोर्ट ने इन दोनों शर्तों के पूरा होने के बाद निगम को जवाब पेश करने की छूट दी। पेड़ लगाने की फोटो पेश करें, देखभाल भी करनी होगी अदालत ने नगर निगम से कहा- वह तीन सप्ताह की अवधि में आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र में 25 छायादार पेड़ लगाएं। इन लगाए गए पेड़ों की तस्वीरें रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। साथ ही इस बात का शपथ पत्र भी पेश करें कि नगर निगम जयपुर इन पौधों की तब तक उचित देखभाल करेगा, जब तक वे विकसित नहीं हो जाते। इसके अलावा निगम को 10 हजार रुपए राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पास तीन सप्ताह में जमा कराने होंगे। इसका उपयोग बार एसोसिएशन द्वारा केवल प्रैक्टिस के पांच साल से कम अनुभव वाले युवा वकीलों के लिए कानून की किताबें खरीदने के लिए किया जाएगा। ढाई साल से पेश नहीं किया था जवाब दरअसल, याचिकाकर्ता साहुल कुमार ने रजिस्टर्ड गोदनामे के आधार पर सफाईकर्मी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति में आवेदन किया था। निगम ने उसके आवेदन पर जांच के बाद उसे नियुक्ति दे दी। निगम में उसके खिलाफ शिकायत हुई, जिसमें नियुक्ति पर सवाल उठाया गया। निगम ने अपनी जांच में नियुक्ति को सही ठहराया, लेकिन वापस शिकायत आने पर उसे जानकारी छुपाने के आधार पर बर्खास्त कर दिया। इसके बाद उसने साल 2024 में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की। निगम ने पिछले ढाई साल में भी जवाब पेश नहीं किया। इस पर कोर्ट ने निगम आयुक्त को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के आदेश दिए थे।