जयपुर में संयुक्त कलाकार अभियान की ओर से आज रवीन्द्र मंच पर प्रस्तावित क्रमिक अनशन की शुरुआत करने पहुंचे कलाकारों को मंच परिसर में प्रवेश नहीं मिल सका। कलाकारों के पहुंचने से पहले ही रवीन्द्र मंच के गेट पर ताले लगा दिए गए। इसके बाद कलाकारों ने गेट के बाहर ही बैठकर क्रमिक अनशन शुरू करने की कोशिश की। राजस्थान की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं की बदहाल स्थिति और कलाकारों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर उज्ज्वल प्रकाश मिश्रा रवीन्द्र मंच के बाहर सड़क पर ही अनशन पर बैठे। इस दौरान उनका माल्यार्पण कर क्रमिक अनशन की शुरुआत करवाई गई। कलाकारों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। पुलिस पहुंची, सड़क पर अनशन की अनुमति नहीं होने का हवाला रवीन्द्र मंच के बाहर कलाकारों के बैठने की सूचना के बाद कुछ ही देर में पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने कलाकारों को कलेक्टर की ओर से जारी नियमों और लागू आचार संहिता की जानकारी दी। सड़क पर अनशन की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए कलाकारों को वहां से हटने के लिए कहा गया। इस दौरान कलाकारों और पुलिस के बीच काफी देर तक बातचीत और बहस हुई। कलाकारों का कहना था कि वे किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते और अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। प्रबंधक कविता गोदारा ने कराई अधिकारियों से बातचीत मामला बढ़ता देख रवीन्द्र मंच की प्रबंधक कविता गोदारा कलाकारों के पास पहुंचीं। इसके बाद मोबाइल फोन के माध्यम से कलाकारों की कला एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों से बातचीत कराई गई। बातचीत के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी अनुपम कायल ने कलाकारों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन देते हुए करीब 15 दिन का समय मांगा। कलाकार प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से कहा कि यदि मांगों के समाधान के लिए समय की आवश्यकता है तो वे एक माह का समय ले सकते हैं, लेकिन इस अवधि में समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। कलाकारों ने स्पष्ट किया कि यदि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को फिर से शुरू किया जाएगा और इस बार इसे पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। एक महीने का समय देकर क्रमिक अनशन स्थगित विभागीय अधिकारियों से बातचीत और आश्वासन के बाद संयुक्त कलाकार अभियान ने फिलहाल प्रस्तावित क्रमिक अनशन को स्थगित करने का निर्णय लिया। अभियान से जुड़े उज्ज्वल प्रकाश मिश्रा और आरजे अमित ने कहा कि सरकार को दिया गया एक माह का समय मांगों के समाधान के लिए अंतिम अवसर के रूप में है। उन्होंने कहा कि कलाकारों का उद्देश्य सरकार से टकराव करना नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक संस्थाओं को मजबूत करना और कलाकारों की समस्याओं का स्थायी समाधान कराना है। यदि सरकार इस अवधि में ठोस कदम उठाती है तो कलाकार उसका स्वागत करेंगे। लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को दोबारा तेज किया जाएगा। रवीन्द्र मंच के जीर्णोद्धार की प्रमुख मांग संयुक्त कलाकार अभियान की प्रमुख मांगों में रवीन्द्र मंच का विशेषज्ञों की निगरानी में संपूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाला जीर्णोद्धार शामिल है। कलाकारों का कहना है कि जयपुर का यह प्रमुख सांस्कृतिक मंच लंबे समय से कई समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति, कॉफी हाउस को लेकर समाधान, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग और यातायात जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने की मांग भी की गई है।
जवाहर कला केंद्र के बजट और बुकिंग दरों का मुद्दा कलाकारों ने जवाहर कला केंद्र के बजट में की गई कटौती की समीक्षा करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि केंद्र के सुचारु संचालन के लिए पर्याप्त बजट और कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी है। इसके अलावा कलाकारों और गैर-व्यावसायिक सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए ऑडिटोरियम बुकिंग दरों में रियायत देने और जवाहर कला केंद्र में प्रभावी गवर्निंग काउंसिल के गठन की मांग की गई है। संयुक्त कलाकार अभियान ने राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के पुनर्गठन और रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की मांग उठाई है। वहीं राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में राजस्थान के कलाकारों को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है। अभियान की अन्य मांगों में कला एवं संस्कृति विभाग में विभिन्न कला क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को कला एवं संस्कृति सलाहकार के रूप में नियुक्त करना तथा प्रदेश की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाओं में रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और पर्याप्त बजट उपलब्ध कराना शामिल है। वरिष्ठ कलाकार भी पहुंचे क्रमिक अनशन की शुरुआत के दौरान राजस्थान के कला और रंगमंच जगत से जुड़े कई वरिष्ठ कलाकार और रंगकर्मी मौजूद रहे। थिएटर दिग्गज स्वर्गीय एस. वासुदेव सिंह की पत्नी मधु सिंह, मृदुला भसीन, प्रेरणा श्रीमाली, रुचि भार्गव, ईश्वर दत्त माथुर, माधव सिंह, राजेन्द्र शर्मा ‘राजू’, नरेन्द्र अरोड़ा, विजय मिश्र ‘दानिश’, रमन कृष्ण मोहन, रमन कृष्ण अत्रे और राम सहाय पारिक सहित कई कलाकारों ने अभियान को समर्थन दिया। कलाकारों का कहना है कि राजस्थान की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध कला, रंगमंच, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं से भी है। ऐसे में सांस्कृतिक संस्थाओं को मजबूत करना और कलाकारों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है।
रवीन्द्र मंच प्रबंधक कविता गोदारा ने कहा कि कलाकारों की ओर से दिए गए ज्ञापन को उच्च अधिकारियों को पहुंचा दिया है, वे ही अब अंतिम निर्णय लेंगे। मेरे हाथ में सिर्फ इतना ही है।